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ज्ञानेन्द्रिया (SENSE ORGANS)

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1 ज्ञानेन्द्रिया (SENSE ORGANS)
1.7 जिह्वा (Tunge)

ज्ञानेन्द्रिया (SENSE ORGANS)

ज्ञानेन्द्रियां (Sense of Organs) क्या हैं?

मानव शरीर में ज्ञानेन्द्रियां वे अति महत्वपूर्ण अंग हैं जो कि सुनने, देखने, ताप, रंग, स्वाद एवं महसूस करने आदि का पता लगाते हैं।

ज्ञानेन्द्रियों के प्रकारः

ज्ञानेन्द्रियां 05 प्रकार की हैः

  1. त्वचा (Skin))
  2. आंख (Eye)
  3. नाक (Nose)
  4. कान (Ears)
  5. जिह्वा (Tung) ।

त्वचा (Skin)

त्वचा मानव शरीर का बाह्य आवरण है जो कि मानव शरीर की सबसे बडी इन्द्रिय है। इसे स्पर्शेन्द्रिय भी कहते हैं। त्वचा उपकला ऊतकों की कई परतों द्वारा निर्मित होती है तथा अन्तर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों, अस्थिबन्ध (लिगामेन्ट) तथा अन्य आन्तरिक अंगों की रक्षा करती है। मानव में त्वचा का रंग प्रजाति के अनुसार बदलता रहता हैं तथा शुष्क से लेकर तैलीय तक हो सकता है। त्वचा तापावरोधन, संवेदना, विटामिन डी का संस्लेषण एवम विटामिन बी फोलेट का संरक्षण करती है । त्वचा के स्पर्श द्वारा हम वस्तुओं के आकार-प्रकार, कठोरता व कोमलता का अनुभव करते हैं।

त्वचा में संवेदना ग्राही तन्त्रिकाएं होती हैं जो मानव शरीर में असमान रूप से वितरित होती हैं। जब त्वचा में आघात होता है तो सर्वप्रथम उसकी उत्तेजना पीडाग्राही में अनुभव की जाती है। इसकी सूचना मस्तिष्क के अग्रभाग में संवेदी तन्त्रिकाओं के माध्यम से पहुंचती है । प्रान्तस्था भाग में पीडा के प्रति संवेदना उत्पन्न होती है।

त्वचा की दो परतें होती हैं – बाह्य परत तथा आन्तरिक परत।

बाह्य परत को अधिचर्म (Epidermish) कहते हैं तथा आन्तरिक परत को चर्म (Dermish) कहते हैं।

चर्म में श्वेत ग्रन्थियां, तैल ग्रन्थियां,रक्त नलिकाएं तथा स्पर्श कण पाये जाते हैं।

अधिचर्म समय-समय पर शरीर से बाहर निकलते रहते हैं जिसे त्वचा का निर्मोचन (Moulding of Skin) कहते हैं। जैसे सर्प का केंचुला।

शरीर में ताप रक्त वाहिनियों के संकुचन एवं प्रसारण से नियन्त्रित होता है । कम ताप होने पर रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं जिससे रक्त वाहिकाओं में रक्त दाब बढ जाता है जिसके कारण हृदय को अधिक कार्य करना पडता है।

अधिक ताप होने पर रक्त वाहिनियां फैल जाती हैं जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में रक्त दाब कम हो जाता है।

त्वचा का रंग मिलैनीन (Milanine) नामक रंग कण (Pigment) के कारण होता है।

आंख (Eye)

आंख वह संवेदी अंग है जिसके माध्यम से वस्तुओं का दृष्टिज्ञान होता है।

नेत्र के मुख्य भाग कार्निया (Cornea), तारिका (Iris), तारा या पुतली (Pupil),  दृष्टि पटल (Retina),  लेन्स (Lens), श्वेत पटल (Sclera) तथा सिलियरी पिण्ड (Ciliary Pind)  हैं।

कार्निया (Cornea) पारदर्शी होती है, जो नेत्र गोलक के ट्यूनिका फाइब्रोसा आकुली की बाह्य परत होती है

नेत्रदान में कार्निया (Cornea) का दान किया जाता है।

नेत्र गोलक के आन्तरिक भाग- ट्यूनिका वेस्कुलासा वल्वी आकुली के बाह्य भाग को परितारिका और पश्च भाग को रंजित पटल (Choroid) कहा जाता है । परितारिका के मध्य भाग में स्थित गोलाकार छिद्र को पुतली (Pupil)कहते हैं जो कैमरा के डायफ्राम की तरह कार्य करता है।

सिलीयरी पिण्ड लेन्स के फोकस को नियन्त्रित करता है जिसमें शलाका (Rods) तथा शंकु (Cones) नामक दो पेशियां होती हैं।

रेटिना के पश्चभाग को नेत्रफण्डस कहा जाता है जिसके दो भाग पीत बिन्दु (Macula Lutea) तथा दृक बिन्दु (Optic Disk or Blind Spot)  होते हैं । दृक बिन्दु से निकलने वाली दृष्टि तन्त्रिकाएं प्रतिबिम्ब की सूचना मस्तिष्क को देती है । वस्तु का प्रतिबिम्ब दृक बिन्दु पर ही बनता है।

पीत बिन्दु में बहुतायत संख्या में मौजूद शंकु कोशिकाओं के कारण वस्तुएं स्पष्ट रूप से दिखायी देती हैं । रेटिना में कुल शलाकाओं की संख्या लगभग 13,00,00,000 होती हैं जो कम रोशनी में भी वस्तुओं को देखने में मदद करती हैं।

आंख का लेन्स उत्तल लेन्स की तरह कार्य करता है।

प्रकाश की तीव्रता को तारिका नियन्त्रित करती है। तीव्र प्रकाश होने पर तारिका फैलकर तारा को संकुचित कर देती है जिससे प्रकाश की कम मात्रा लेन्स में प्रवेश करती है। मन्द प्रकाश होने पर तारिका संकुचित होकर तारा को फैला देती है जिसके कारण प्रकाश की अधिक मात्रा लेन्स पर पडती है।

नाक (Nose)

मानव शरीर के वह अंग जिससे सूंघकर किसी वस्तु की गंध-दुर्गंध ज्ञात होती है उसे नाक कहते हैं। यह मानव शरीर का घ्रांण संवेदी अंग है । घ्रांण की अनुभूति मस्तिष्क में होती है।

कान (Ears)

कान मानव शरीर का वह अंग है जो ध्वनि का पता लगाता है। कान ध्वनि के लिए एक रिसीवर के रूप में कार्य करता है।

कान के तीन भाग- बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण तथा आन्तरिक कर्ण है।

बाह्य कर्ण उपास्थि (Cartilage) का बना होता है।

मध्य कर्ण में तीन अस्थियां- इन्कस, मैलियस तथा स्टेपीज होती हैं जो ध्वनि कम्पनों को बाह्य कर्ण से आन्तरिक कर्ण तक पहुंचाती है। मध्य कर्ण बाह्य तथा आन्तरिक कर्ण को जोडने का कार्य़ करता है।

आन्तरिक कर्ण अर्ध्दपारदर्शक झिल्ली का बना होता है  जिसे कला गहन (Membranous Labyrinth) कहते  है।

कान शरीर का सन्तुलन एवं सुनने का कार्य करते हैं।

जिह्वा (Tunge)

मानव शरीर का वह अंग जिससे स्वाद का पता चलता है जिह्वा कहलाती है । जिह्वा पर स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) पायीं जाती हैं जिससे स्वाद का पता चलता है। जिह्वा से 04 प्रकार के स्वाद– मीठा, तीता, नमकीन तथा खट्टा का अनुभव होता है।

किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब आंख के किस भाग पर बनता है?

रेटिना पर।

आंख में बाहर से पडने वाले प्रकाश को कौन सा भाग नियन्त्रित करता है?

आइरिस।

आंख का लेन्स किस लेन्स की भांति कार्य करता है?

उत्तल लेन्स

मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी स्टपीज किस अंग में होती है?

कान में होती है।

. मानव शरीर का घ्रांण संवेदी अंग कौन है?

मानव शरीर का घ्रांण संवेदी अंग नाक है।   

. मानव शरीर का बाहरी आवरण क्या है?

मानव शरीर का बाह्य आवरण त्वचा है।

. मानव शरीर की सबसे बडी इन्द्री कौन है?

त्वचा है।

. स्पर्शेन्द्रिय किसे कहते हैं?

त्वचा को।

. अन्तर्निहित मांसपेशियों, अस्थियों, अस्थिबन्ध (लिगामेन्ट) तथा अन्य आन्तरिक अंगों की रक्षा कौन करती है?

त्वचा करती है।

 . त्वचा की कितनी परतें होती हैं?

त्वचा की दो परतें होती हैं– बाह्य परत तथा आन्तरिक परत।

. अधिचर्म (Epidermish) क्या है?

त्वचा की बाह्य परत हैं।

. चर्म (Dermish) क्या हैं?

त्वचा की आन्तरिक परत हैं।

. श्वेत ग्रन्थियां, तैल ग्रन्थियां, रक्त नलिकाएं तथा स्पर्श कण त्वा की किस परत में पाये जाते हैं?

चर्म (Dermish) में पायी जाती हैं।

. त्वचा का निर्मोचन (Moulding of Skin) क्या है?

अधिचर्म समय-समय पर शरीर से बाहर निकलते रहते हैं जिसे त्वचा का निर्मोचन (Moulding of Skin) कहते हैं। जैसे सर्प का केंचुला।

. रक्त वाहिनियों का ताप पर क्या प्रभाव पड़ता है?

शरीर में ताप रक्त वाहिनियों के संकुचन एवं प्रसारण से नियन्त्रित होता है। कम ताप होने पर रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं जिससे रक्त वाहिकाओं में रक्त दाब बढ जाता है जिसके कारण हृदय को अधिक कार्य करना पडता है।

अधिक ताप होने पर रक्त वाहिनियां फैल जाती हैं जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में रक्त दाब कम हो जाता है।

. त्वचा का रंग किस कारण होता है?

त्वचा का रंग मिलैनीन (Milanine) नामक रंग कण (Pigment) के कारण होता है।

. वस्तुओं का दृष्टिज्ञान किससे होता है?

आंख से होता है।

. नेत्र के मुख्य भाग कौन-कौन हैं?

नेत्र के मुख्य भाग कार्निया (Cornea), तारिका (Iris), तारा या पुतली (Pupil),  दृष्टि पटल (Retina), लेन्स (Lens), श्वेत पटल (Sclera) तथा सिलियरी पिण्ड (Ciliary Pind)  हैं।

. नेत्रदान में आंख के किस भाग का दान किया जाता है?

कार्निया (Cornea) का दान किया जाता है।

. नेत्र का कौन सा भाग कैमरा के डायफ्राम की तरह कार्य करता है?

पुतली (Pupil) करती है।

. नेत्रफण्डस क्या है?

रेटिना के पश्चभाग को नेत्रफण्डस कहा जाता है जिसके दो भाग पीत बिन्दु (Macula Lutea) तथा दृक बिन्दु (Optic Disk or Blind Spot)  होते हैं। दृक बिन्दु से निकलने वाली दृष्टि तन्त्रिकाएं प्रतिबिम्ब की सूचना मस्तिष्क को देती है । वस्तु का प्रतिबिम्ब दृक बिन्दु पर ही बनता है।

पीत बिन्दु में बहुतायत संख्या में मौजूद शंकु कोशिकाओं के कारण वस्तुएं स्पष्ट रूप से दिखायी देती हैं।

. रेटिना में कुल कितनी शलाका होती हैं?

रेटिना में कुल शलाकाओं की संख्या लगभग 13,00,00,000 होती हैं जो कम रोशनी में भी वस्तुओं को देखने में मदद करती हैं।

. नेत्र में प्रकाश की तीव्रता को कौन  नियन्त्रित करती है?

प्रकाश की तीव्रता को तारिका नियन्त्रित करती है। तीव्र प्रकाश होने पर तारिका फैलकर तारा को संकुचित कर देती है जिससे प्रकाश की कम मात्रा लेन्स में प्रवेश करती है। मन्द प्रकाश होने पर तारिका संकुचित होकर तारा को फैला देती है जिसके कारण प्रकाश की अधिक मात्रा लेन्स पर पडती है।

. नाक क्या है?

मानव शरीर के वह अंग जिससे सूंघकर किसी वस्तु की गंध-दुर्गंध ज्ञात होती है उसे नाक कहते हैं। यह मानव शरीर का घ्रांण संवेदी अंग है। घ्रांण की अनुभूति मस्तिष्क में होती है।

. कान क्या है?

कान मानव शरीर का वह अंग है जो ध्वनि का पता लगाता है।

. मानव शरीर का कौन सा अंग ध्वनि के लिए एक रिसीवर का कार्य करता है?

कान ध्वनि के लिए एक रिसीवर के रूप में कार्य करता है।

. कान के कितने भाग हैं?

तीन भाग (बाह्य कर्ण, मध्य कर्ण तथा आन्तरिक कर्ण) है।

. इन्कस, मैलियस तथा स्टेपीज नामक अस्थियां कान के किस भाग में पायी जाती हैं?

मध्य कर्ण में पायी जाती हैं। ये अस्थियां ध्वनि कम्पनों को बाह्य कर्ण से आन्तरिक कर्ण तक पहुंचाती है।

. स्वाद का पता किस अंग से चलता है?

स्वाद का पता जिह्वा से चलता है।

. जिह्वा के किस भाग से स्वाद कलिकाओं का पता चलता है?

स्वाद कलिकाओं से स्वाद का पता चलता है।

. जिह्वा से कितने प्रकार के स्वाद का अनुभव होता है?

जिह्वा से 04 प्रकार के स्वाद (मीठा, तीता, नमकीन तथा खट्टा) का अनुभव होता है।

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