तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण (Classification of Elements)

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Classification of Elements

तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण (Classification of Elements)

तत्वों को उनके परमाणु आयतनों के आधार पर सर्वप्रथम वर्गीकरण 1860 ई0 में जर्मन रासायनिज्ञ लाथर मेयर ने किया था।

किसी मौलिक गुण को आधार बनाकर की गई पदार्थों का ऐसी व्यवस्था जिसमें एक निश्चित अन्तराल के बाद समान गुण वाले पदार्थ पुनः उपस्थित हों, तत्वों का अवर्ती वर्गीकरण कहलाता है।

तत्वों का प्रथम आवर्ती वर्गीकरण रूसी वैज्ञानिक मेण्डलीफ ने 1861 ई0 में  किया।

मेण्डलीफ का आवर्त नियमः

इस नियम के अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनकी परमाणु भारों के आवर्त फलन होते हैं। अर्थात य़दि तत्वों को इनके परमाणु भारों के बढते क्रम में रखा जाता है तो उनके गुणों में आवर्तिता (Periodicity होती है।

मेण्डलीफ द्वारा बनाई गई आवर्त सारणी में प्रारम्भ में 08 वर्ग तथा 7 आवर्त थे। बाद में अक्रिय गैसों की खोज होने पर अक्रिय गैसों को 09 वें वर्ग में रखा गया तब 09 वर्ग तथा 7 आवर्त हो गए थे। 09 वें वर्ग को शून्य वर्ग कहा जाता है।

तत्वों के परमाणु भार के वृध्दि क्रम में क्रमबध्द करने पर प्राप्त क्षैतिज कतारों को आवर्त कहते हैं। तत्वों को परमाणु भार के वृध्दि क्रम में क्षैतिज कतारों में सजाने पर समान गुण वाले तत्व एक ही ऊर्ध्वाधर कालम में उपस्थित रहते हैं, जिन्हे वर्ग ( Group) कहते हैं।

आवर्त सारणी के ऊर्ध्व कतारों को समूह या वर्ग कहते हैं ।

आवर्त सारणी के क्षैतिज कतारों को आवर्त कहते हैं।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोषः

  1. समस्थानिकों के लिए स्थान नहीं थे।
  2. समान गुण वाले तत्वों को अलग अलग रखा गया था।
  3. उच्च परमाणु भार वाले तत्वों को कम परमाणु भार वाले तत्वों से पहले रखा गया था।
  4. हाइड्रोजन को क्षार धातु तथा हैलोजन जैसे दोहरे व्यवहार के कारण दोनों वर्गों में रखा गया था।
  5. आठवें वर्ग में तीन तत्वों को एक साथ समूहित कर दिया गया था।

आधुनिक आवर्त सारणीः

आधुनिक आवर्त सारणी  रूसी वैज्ञानिक मेण्डलीफ द्वारा प्रस्तुत आवर्त सारणी का ही आधुनिक रूप है जो जर्मन वैज्ञानिक मोसले के नियम पर आधारित है जिसके अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण उनकी परमाणु क्रमांक  के आवर्त फलन होते हैं। अर्थात य़दि तत्वों को इनके परमाणु क्रमांक के बढते क्रम में रखा जाता है तो उनके गुणों में आवर्तिता (Periodicity होती है।

इस नियम के अनुसार तत्वों का मूल लक्षण परमाणु क्रमांक है। परमाणु भार नही है।

इस आवर्त सारणी में 9 वर्ग तथा 7 आवर्त हैं। वर्ग 1 से 7 तक दो वर्गों “ए” तथा “बी” में बंटे होने के कारण उपवर्गों सहित कुल वर्गों की संख्या 18 है। इस प्रकार आधुनिक आवर्त सारणी में 18 वर्ग तथा 07 आवर्त हैं जिसके कारण आधुनिक आवर्त सारणी को आवर्त सारणी का दीर्घ रूप भी कहते हैं। प्रत्येक आवर्त का प्रथम सदस्य क्षार धातु तथा अन्तिम सदस्य कोई अक्रिय गैस है अपवाद स्वरूप पहले आवर्त का पहला सदस्य हाइड्रोजन है।

परमाणु संख्या 57 से 71 तक को लैंथेनाइड श्रेणी और परमाणु संख्या 89 से 103 तक के तत्वों को एक्टिनाइड श्रेणी कहा जाता है जिन्हे अन्य धातुओं से अलग रखा गया है।

किसी एक वर्ग के सभी तत्वों के परमाणुओं की सबसे बाहरी कक्षा में इलेक्ट्रानों की संख्या समान होती है जिसके कारण किसी एक वर्ग के सभी तत्वों के गुण समान होते है।

प्रथम आवर्त सबसे छोटा है जिसमें मात्र 02 तत्व हैं।

दूसरे तथा तीसरे आवर्त को लघु आवर्त कहते हैं जिनमें आठ-आठ तत्व हैं।

चौथे तथा पांचवें आवर्त को दीर्घ आवर्त कहते हैं जिनमें 18- 18 तत्व हैं।

छठवां आवर्त सबसे बडा आवर्त है जिसमें 32 तत्व हैं।

सातवां आवर्त अपूर्ण हैं।

छठवें आवर्त के तीसरे वर्ग में परमाणु क्रमांक 57 से 71 तक के तत्व हैं  जिसे लैंन्थेनाइड (Lanthenides) कहते हैं।

सातवें आवर्त के तीसरे वर्ग में परमाणु क्रमांक 89 से 103 तक के तत्वों को ऐक्टीनाइड (Actinides) कहते हैं।

आधुनिक आवर्त सारणी में संयोजन के आधार पर तत्वों को निम्नांकित 04 खण्डों में बांटा गया है?

S- Block – वर्ग 01 से 02 तक।

P-Block – वर्ग 13 से 18 तक।

D-Block – वर्ग 03  से 12 तक।

F-Block – लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड।

S- Block तथा P-Block के  तत्वों के सम्मिलित रूप को प्रतिनिधि तत्व कहा जाता है।

D-Block के तत्वों को संक्रमण तत्व एवं F-Block के तत्वों को आन्तरिक संक्रमण तत्व कहा जाता है।

वर्ग 01 व 02 में हल्की धातुएं, वर्ग 03 से 12 तक में भारी या संक्रमण धातुए, वर्ग 13 से 17 तक में अधातुएं तथा वर्ग 18 में अक्रिय गैसें हैं।

आधुनिक आवर्त सारणी के गुणः

  • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है तथा आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का आकार घटता है।
  • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन ऊर्जा घटती है तथा आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर आयनन ऊर्जा बढ़ती जाती है।
  • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत धनात्मकता बढ़ता है तथा आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत धनात्मकता घटती है।
  • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत ऋणात्मकता घटती है तथा आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत ऋणात्मकता बढती है।

∙ इलेक्ट्रान बन्धुता (Electron Afinity )क्या है?

जब कोई उदासीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो उसके परिणाम स्वरूप उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को इलेक्ट्रान बन्धुता कहा जाता है।

क्लोरीन की इलेक्ट्रान बन्धुता सबसे अधिक होती है।

∙ विद्युत ऋणात्मकता क्या (Electron Negativity) है?

किसी तत्व की परमाणु की वह क्षमता जिससे वह साझेदारी करके इलेक्ट्रान जोड़ी को अपनी ओर खींचता है उसे उस तत्व की विद्युत ऋणात्मकता कहा जाता है।

फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है ।

∙ आयनन विभव क्या (Ionisational Potential) है?

आयन विभव ऊर्जा की वह न्यूनतम  मात्रा है जो तत्व की एक गैसीय परमाणु की वाह्यतम कक्षा से एक इलेक्ट्रान को बाहर निकाल देने के लिए आवश्यक है।

. तत्वों का उनके परमाणु आयतनों के आधार पर सर्वप्रथम वर्गीकरण किसने किया था?

1860 ई0 में जर्मन रासायनिज्ञ लाथर मेयर ने किया था।

. तत्वों का प्रथम आवर्ती वर्गीकरण कब तथा किसने किया था?

1861 ई0 में रूसी वैज्ञानिक मेण्डलीफ ने किया था।

. मेण्डीलीफ की आवर्त सारणी के किस वर्ग को शून्य वर्ग कहा जाता है?

09 वें वर्ग को।

आधुनिक आवर्त सारणीः

. आधुनिक आवर्त सारणी  किस वैज्ञानिक के नियम पर आधारित है?

जर्मन वैज्ञानिक मोसले के नियम पर आधारित है।

. आधुनिक आवर्त सारणी  के अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण किसके आवर्त फलन होते हैं?

परमाणु क्रमांक।

. आधुनिक आवर्त सारणी  के अनुसार तत्वों का मूल लक्षण क्या है?

परमाणु क्रमांक है।

. मेण्डिलीफ की आवर्त सारणी अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुण किसके आवर्त फलन होते हैं?

परमाणु भारों  के आवर्त फलन होते हैं।

. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी में कितने वर्ग तथा आवर्त है?

प्रारम्भ में 08 वर्ग तथा 7 आवर्त थे। बाद में अक्रिय गैसों की खोज होने पर अक्रिय गैसों को 09 वें वर्ग में रखा गया तब 09 वर्ग तथा 7 आवर्त हो गए थे।

. आधुनिक आवर्त सारणी में कितने वर्ग तथा आवर्त है?

आधुनिक आवर्त सारणी में 18 वर्ग तथा 07 आवर्त हैं जिसके कारण आधुनिक आवर्त सारणी को आवर्त सारणी का दीर्घ रूप भी कहते हैं

. किस तत्व की इलेक्ट्रान बन्धुता सबसे अधिक होती है?

क्लोरीन।

. सबसे छोटा आवर्त कौन है?

प्रथम आवर्त

. लघु आवर्त किसे कहते हैं?

दूसरे तथा तीसरे आवर्त को

. दीर्घ आवर्त कौन है?

चौथे तथा पांचवा आवर्त।

. सबसे बड़ा आवर्त कौन है?

छठवां आवर्त।

. अपूर्ण आवर्त कौन है?

सातवां आवर्त।

. किस तत्व की विद्युत ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है?

फ्लोरीन।