विलयन (SOLUTION)

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SOLUTION

विलयन (SOLUTION)

विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है जो स्थायी एवं पारदर्शक होता है।

विलेय कणों का आकार (Solute particle size)

विलयन के विलेय कणों का आकार 10-7 सेमी0 से भी कम होता है जिसके कारण इसे सूक्ष्मदर्शी से भी नही देखा जा सकता है।

विलायक तथा विलेय (Solvent and Solute)

विलयन में जो पदार्थ अधिक मात्रा में होता है उसे विलायक तथा जो पदार्थ कम मात्रा में होता है उसे विलेय कहते हैं।

अच्छा विलायक (Good Solvent)

जिस विलायक का डाई इलेक्ट्रिक नियतांक जितना अधिक होता है वह उतना ही अच्छा विलायक माना जाता है।

सार्वत्रिक विलायक (Universal solvent)

जल का डाइलेक्ट्रिक नियतांक अधिक होने के कारण इसे सार्वत्रिक विलायक कहते हैं।

विलयन कितने प्रकार का होता है?

What is the type of solution?

विलयन 09 प्रकार का होता है जो निम्नवत है –

  1. ठोस में ठोस का विलयन (Solution of solid into solid)- मिश्र धातुएं जैसे- पीतल (तांबा व जस्ता )।

यहां पर मिश्र धातु पीतल ठोस पदार्थ है जो दो ठोस धातु तांबा व जस्ता से बनी है। इस प्रकार मिश्र धातु पीतल ठोस में ठोस का विलयन है।

  1. ठोस में गैस का  विलयन (Gas solution into solid)-  जैसे- कपूर में वायु का विलयन।
  2. द्रव में द्रव का विलयन (Liquid solution)– जैसे- जल में अल्कोहल या नमक का  विलयन।
  3. द्रव में गैस का विलयन (Gas solution in liquid)–  जैसे- जल में कार्बन डाइऑक्साइड का विलयन।
  4. द्रव में ठोस का विलयन (Solution of solid in liquid) जैसे- पारा में लेड का विलयन।
  5. ठोस में द्रव का विलयन (Solution of liquid in solid)– जैसे- थैलियम में पारा का विलयन।
  6. गैस में ठोस का विलयन (Solid solution in gas)– जैसे- वायु में आयोडीन का विलयन।
  7. गैस में गैस का विलयन (Gas solution)– जैसे – वायु, गैसों का मिश्रण।
  8. गैस में द्रव का विलयन (Liquid solution in gas)– जैसे- बादल, कुहरा, अमोनिया गैस का जल में विलयन।

विलायक का उपयोग (Uses of solvent)

.1. पेय एवं खाने वाले पदार्थों के निर्माण में।
2. निर्जल धुलाई में।
3. औषधि, सेन्ट तथा इत्र आदि के निर्माण में।

परिक्षेपण (Reflection)

जब किसी पदार्थ के कण दूसरे प्रकार की कणों के आस-पास छितरा दिये जाते हैं तो इस क्रिया को परिक्षेपण कहते हैं। पहले पदार्थ को परिक्षेपित पदार्थ तथा दूसरे पदार्थ को परिक्षेपण माध्यम कहा जाता है।

परिक्षेपण के परिणामस्वरूप दो प्रकार के पदार्थ बनते हैः

  1. समांग पदार्थ (वास्तविक विलयन)।
  2. विषमांग पदार्थ (निलंबन एवं कोलांइड)।

निलंबन (Suspension)

इसमें परिक्षेपित कणों का आकार 10-3 से 10-4  सेंटीमीटर या इससे अधिक होता है। इसके कण अस्थाई होते हैं तथा छन्ना पत्र के आर पार नहीं आ जा सकते। जैसे- नदी का गन्दा पानी, वायु में धुआ आदि।

कोलांइड (Colloids)

इसमें परिक्षेपित कणों का आकार 10-5 से 10-7  सेंटीमीटर होता है। इसके कण छन्ना पत्र के आर पार  आ जा सकते हैं परन्तु चर्म पत्र  के आर पार  नही  जा सकते हैं । जैसे- दूध, गोंद, स्याही, रक्त आदि।

कोलाइड के प्रकारः

कोलाइड तीन प्रकार के होते हैः सोल, जेल तथा एरोसोल।

सोलः  इसमें ठोस कण द्रव में परिक्षेपित होते  हैं।

जेलः  ऐसे कोलांइड जिसमें ठोस कण द्रव में समान रूप से परिक्षेपित होते हैं परन्तु उनमें प्रवहता नहीं होती जेल कहलाते हैं । जैसे-  जेली तथा जिलेटिन आदि।

एरोसोलः किसी गैस में ठोस या द्रव कणों का परिक्षेपण एरोसोल कहलाता है। परिक्षेपित कण ठोस होने पर  एरोसोल को धुंआ तथा परिक्षेपित कण द्रव होने पर  एरोसोल को कोहरा  कहते हैं।

साबुन,पेन्ट, डिटर्जेंट एवं काडलीवर तेल कृत्रिम पायस है।

झागः  द्रव में गैस का परिक्षेपण झाग कहलाता है जो साबुन उत्पन्न होता है।

वास्तविक विलयनः

यह विलयन स्थाई एवं पारदर्शक होता है जिसके कणों का आकार 10-7  से 10-8 सेंटीमीटर होता है। इसके कण छन्ना पत्र के आर पार आ जा सकते हैं अर्थात इसकी कणों को छन्ना पत्र से छाना नहीं जा सकता है।

. अपोहन क्या है?

वास्तविक विलयन से कोलाइडी विलयन को अलग करने की प्रक्रिया अपोहन कहलाती है। कोलाइडी विलयन का शुद्धीकरण इसी विधि से किया जाता है।

. ब्राउनी गति क्या है?

कोलाइडी विलयन के कण निरन्तर इधर उधर गतिशील रहते हैं जिसे ब्राउनी गति कहा जाता है।

. बफर विलयन क्या है?

ऐसा विलयन जो अम्ल या क्षार की साधारण मात्राओं को अपनी प्रभावी अम्लता या क्षारता में पर्याप्त परिवर्तन किए बिना अवशोषित कर लेता है, बफर विलयन कहलाता है।

. टिंडल प्रभाव क्या है?

जब किसी कोलाइडी विलियन में तीव्र प्रकाश गुजारते हैं तो इसके लम्बवत रखे सूक्ष्मदर्शी में देखने पर कोलाइड के कण काली पृष्ठभूमि में आलपिन की नोक की भांति चमकने लगते हैं इसे ही टिंडल प्रभाव कहा जाता है।

. प्रकाश का प्रकीर्णन क्यों  होता है?

प्रकाश का प्रकीर्णन टिंडल प्रभाव के कारण होता है।

. दूध क्या है?

दूध प्राकृतिक पायस है।

. हाइड्रोसोल क्या है?

परिक्षेपण का माध्यम जल होने पर कोलाइड को हाइड्रोसोल कहा जाता है।

. हाइड्रोसॉल क्या है?

परिक्षेपण का माध्यम बेंजीन होने पर कोलाइड को हाइड्रोसॉल कहा जाता है।

. अल्कोहल क्या है?

परिक्षेपण का माध्यम अल्कोहल होने पर कोलाइड को अल्कोहल कहा जाता है।

. पायस तथा पायसीकरण क्या है?

जब किसी कोलाइड में एक द्रव  के सारे कण दूसरे द्रव के सारे कणों में परिक्षेपित हो जाते हैं परन्तु घुलते नहीं है तब इस को कोलाइड को पायस कहते हैं तथा पायस बनाने की इस विधि को पायसीकरण कहा जाता है।

. विलयन का सांद्रण क्या है?

किसी विलयन की काई मात्रा में खुले की मात्रा को उस विलयन का सांद्रण कहते हैं।

 . सांद्र विलयन क्या है?

जिस विलयन में विलेय की पर्याप्त मात्रा घुली होती है उसे सांद्र विलयन कहते हैं।

 . तनु विलयन क्या है? 

जिस विलयन में विलेय की कम मात्रा घुली होती है उसे  तनु विलयन कहते हैं। सभी तनु विलयन असंतृप्त विलयन होते हैं।

. संतृप्त विलयन क्या है?

वह विलयन जिसमें किसी निश्चित ताप पर विलेय पदार्थ की मात्रा अधिकतम होती है, संतृप्त विलियन कहते हैं।

. असंतृप्त विलयन क्या है?

किसी निश्चित ताप पर बना वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा  घुलाई जा सकती है उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं।

. अतिसंतृप्त विलयन क्या है?

ऐसा संतृप्त विलयन जिसमें विलेय की मात्रा उस  विलयन को संतृप्त करने के लिए आवश्यक विलेय की मात्रा से अधिक घुली हुई हो, उसे अतिसंतृप्त विलयन कहते हैं।

. विलेयता क्या है?

किसी निश्चित ताप तथा दाब पर 100 ग्राम विलायक में घुलने वाली विलेय की अधिकतम मात्रा को उस विलेय पदार्थ की उस विलायक में विलेयता कहते हैं।

अर्थात किसी पदार्थ की विलायक में विलेयता, विलायक और विलेय की प्रकृति एवं ताप व दाब पर निर्भर करती है।

. विलेयता पर दाब का क्या प्रभाव पडता है?

दाब बढ़ाने पर द्रव में गैस की विलेयता बढ़ जाती है।

. विलेयता पर ताप का क्या प्रभावपडता है?

विलेयता पर ताप का निम्नांकित प्रभाव पडता हैः

  • ताप बढ़ाने पर द्रव में गैस की विलेयता घट जाती ह ।
  • ताप बढ़ाने से ठोस पदार्थों की विलेयता बढती है परन्तु कुछ ठोस पदार्थों की विलेयता ताप बढ़ाने से घटती है । जैसे-  कैल्शियम हाइड्रोक्साइड, कैल्शियम सल्फेट तथा  कैल्शियम नाइट्रेट आदि।