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विशेषण (Adjective)

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1 विशेषण (Adjective)

विशेषण (Adjective)

वह शब्द जिनसे संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट होती है विशेषण कहलाते हैं। जैसे- सात लड़के, गिलास पर दूध, बड़ा फूल, मोटा हाथी, सुन्दर गुड़िया आदि।

विशेष्यः

विशेषण शब्द की विशेषता प्रकट करता है उसे विशेष्य कहते हैं जैसे सुंदर लड़की में सुंदर विशेषण तथा लड़की विशेष्य है।

गिलास भर दूध में गिलास भर विशेषण तथा दूध विशेष्य है।

पांच लड़की में पांच विशेषण तथा लड़की विशेष्य है।

विशेषण के प्रकारः

विशेषण चार प्रकार के होते हैः  गुणवाचक विशेषण, संख्यावाचक विशेषण, परिमाणवाचक विशेषण तथा संकेतवाचक विशेषण।

गुणवाचक विशेषणः

वे शब्द जो किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष, रंग, आकार दशा आदि का कराते हैं उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं।

गुणः  अच्छा, भला, सुन्दर, सुशील तथा सदाचारी आदि।

दोषः  सदाचारी, बुरा, कुरूप, दुर्जन, नीच, दुष्ट आदि।

कालः  नया, मध्यकालीन, ब्रिटिश कालीन, पुराना, आधुनिक कालीन, प्राचीन कालीन आदि।

देशः   भारतीय, देश, विदेशी, रूसी, नेपाली, जापानी, पाकिस्तानी आदि।

दिशाः   पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी, दक्षिणी, पश्चिमोत्तर, दक्षिणोत्तर आदि।

आकारः  लम्बा, चौड़ा, चौकोर, गोल, तिकोना आदि।

स्थानः   बाहरी, भीतरी, ऊंचा, नीचा, समतल, गड्ढा शादी।

दशाः   स्वस्थ, निरोग, हृष्ट पुष्ट, हर्बल, रोगी आदि।

संख्यावाचक विशेषणः

वे शब्द जिनसे विशेष्य की संख्या का बोध होता है, संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।

संख्यावाचक विशेषण के प्रकारः

संख्यावाचक विशेषण तीन प्रकार का होता हैः निश्चित संख्यावाचक, अनिश्चित संख्यावाचक तथा प्रत्येक बोधक।

निश्चित संख्यावाचकः

इससे किसी निश्चित संख्या का बोध होता है।

इसके चार भेद हैः गणना वाचक, क्रम वाचक, आवृत्तिवाचक तथा समुदाय वाचक।

गणना वाचकः  एक, दो, तीन, चार, पांच, सात, नौ, दस आदि।

क्रम वाचकः  पहला, दूसरा, तीसरा, चौथा, पांचवा, छठवां आदि।

आवृत्तिवाचकः दुगुना, तिगुना, चौगुना, पंचगुना आदि।

समुदाय वाचकः  दोनों, तीनों, चारों, पांचो आदि।

अनिश्चित संख्यावाचकः 

इसमें संख्या का ज्ञान नहीं होता।  जैसे- बहुत, कुछ, थोड़ा आदि।

प्रत्येक बोधकः

इन्हें पार्थक्यवाचक भी करते हैं क्योंकि ये एक जाति की हर वस्तु के सूचक होते हैं।

जैसे-  प्रत्येक भारतीय में प्रत्येक शब्द प्रत्येक बोधक है।

परिमाणवाचक विशेषणः

वे शब्द जिनसे नाप-तौल यानी मात्रा प्रकट होती है, परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं।

जैसे- मुझे पांच केला चाहिए। वर्ष में बारह महीने होते हैं।

उपरोक्त वाक्यो  में पांच केला तथा बारह महीने शब्द परिमाणवाचक विशेषण हैं।

परिमाणवाचक विशेषण दो प्रकार के होते हैं- निश्चित परिमाणवाचक विशेषण तथा अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण।
निश्चित परिमाणवाचक विशेषणः

वे शब्द जिससे किसी निश्चत संख्या का बोध होता है, निश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है। जैसे- दो लीटर, तीन मीटर आदि।

अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषणः

ये दो प्रकार के होते हैः अनिश्चित परिमाणवाचक तथा अनिश्चित संख्यावाचक।

अनिश्चित परिमाणवाचकः  वे शब्द जिससे किसी अनिश्चित परिमाण का बोध होता है, अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहलाते है। जैसे- कुछ पानी, थोड़ा तेल आदि।

अनिश्चित संख्यावाचकः  वे शब्द जिससे किसी अनिश्चित संख्या का बोध होता है, अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते है। जैसे- कुछ कलम,  कुछ टोकरी आदि।

अनिश्चित परिमाणवाचक तथा अनिश्चित संख्यावाचक में अन्तरः

अनिश्चित परिमाणवाचक गिने नही जा सकते जबकि अनिश्चित संख्यावाचक गिने जा सकते हैं।

संकेतवाचक विशेषणः

वे शब्द जो किसी  संज्ञा (विशेष्य) की तरफ संकेत करते हैं, संकेतवाचक विशेषण कहलाते हैं। जैसे- ये किताब किसकी है। में ये शब्द संकेतवाचक विशेषण है।

संकेतवाचक विशेषण को निर्देशक या सार्वनामिक विशेषण भी कहते हैं।

विशेषण की तुलनात्मक अवस्थाएः

विशेषण की तीन तुलनात्मक अवस्थाएं हैं- मूलावस्था, उत्तरावस्था तथा उत्तमावस्था।

मूलावस्थाः श्यामू कंजूस है।

उत्तरावस्थाः श्यामू  रामू से अधिक कंजूस है।

उत्तमावस्थाः श्यामू  सबसे अधिक कंजूस है।

संस्कृत में मूल विशेषण में उत्तरावस्था में तर तथा उत्तमावस्था में तम शब्द जोड़ देते हैं।

मूलावस्था                                उत्तरावस्था                            उत्तमावस्था  

महान                                          महानतर                                   महानतम

प्रिय                                            प्रियतर                                     प्रियतम

लघु                                            लघुतर                                      लघुत्तम

विशेषण में विकारः

विशेषण में लिंग, वचन तथा कारक के आधार पर परिवर्तन हो जाता है। विशेषण तथा विशेष्य का लिंग, वचन तथा कारक एक ही होता है।

विशेषण में विकार के नियमः

  1. अकारान्त विशेषण स्त्रीलिंग विशेष्य के साथ इकारान्त भी हो जाता है जैसे- अच्छा छात्र- अच्छी छात्रा।
  2. अकारान्त विशेषण बहुवचन में एकान्तर हो जाता है। जैसे- मीठा सेब- मीठे सेब।
  3. विभक्त चिन्ह विशेष्य के साथ लगते हैं, विशेषण के साथ नही लगते। जैसे- परिश्रमी मजदूर को पुरस्कार मिलेगा। में कारक चिन्ह मजदूर के साथ लगा है परिश्रमी के साथ नही। यहां पर “को” शब्द कारक है।
  4. संस्कृत विशेषणों में लिंग के अनुसार परिवर्तन भी होता है ता नही भी। जैसे- प्रिय बालक।

परन्तु कहीं कहीं पर अनिवार्य रूप से परिवर्तन भी करना पड़ता है। जैसे- विदुषी महिला, रूपवती बालिका आदि।

  1. विशेषण का भी विशेषण होता है। जैसे- अति सुन्दर भवन। यहां पर सुन्दर शब्द को विशेषण तथा अति शब्द को विशेषण न कह कर प्रविशेषण कहा जाता है।

क्रिया विशेषणः

वे शब्द जो क्रिया की विशेषता बताते है, क्रिया विशेषण कहलाते हैं।

जैसे- वह तेज दौड़ता है। वे शीघ्र जायेंगे। तुम जल्दी जाओ। मैं तेज खेलता हूं।

उपरोक्त वाक्यों में तेज, शीघ्र, जल्दी तथा तेज शब्द क्रिया विशेषण हैं।

क्रिया विशेषण के भेदः

क्रिया विशेषण के 03 भेद हैं- स्थानवाचक क्रिया विशेषण, काल वाचक क्रिया विशेषण तथा रीतिवाचक क्रिया विशेषण।

स्थानवाचक क्रिया विशेषणः

वे शब्द जो क्रिया के स्थान से सम्बन्धित कोई सूचना देते हैं, स्थानवाचक क्रिया विशेषण कहलाते हैं। जैसे- इधर,उधर, जहां, तहां, यहां, वहां, दायें, बायें, ऊपर, नीचे, अन्दर, बाहर, कहां, कब आदि।

कुछ उदाहरणः तुम जहां जाओगे वहीं पर शोर मचाओगे। इधर-उधर मत दौड़ो। इन वाक्यों में जहां, वहीं, इधर, उधर शब्द स्थानवाचक क्रिया विशेषण हैं।

काल वाचक क्रिया विशेषणः

वे शब्द जो क्रिया के होने के समय का ज्ञान कराते हैं, काल वाचक क्रिया विशेषण कहलाते हैं। जैसे- अभी, तभी, कभी, सदा, प्रतिदन, अगले, पिछले, पहले, अन्त में, रविवार को, गत अभी आदि।

कुछ उदाहरणः खेलने से कभी जी मत चुराओ। सदा मीठा वोलो। इन वाक्यों में सदा एवं कभी शब्द  काल वाचक क्रिया विशेषण हैं।

रीतिवाचक क्रिया विशेषणः

वे शब्द जिनसे रीति या ढंग का बोध होता है, रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहलाते हैं। जैसे- अवश्य, तेज, धीरे-धीरे, अचानक, सचमुच, शीघ्र, शायद, जोर से, हां, मत, ठीक, यधाशक्ति, न, नही, प्रायः, कभी आदि।

क्रिया विशेषण बनाने के नियमः

रचना के अनुसार क्रिया विशेषण 02 प्रकार के होते हैः मूल क्रिया विशेषण तथा यौगिक क्रिया विशेषण।

मूल क्रिया विशेषणः

इस क्रिया विशेषण का रूप सदा एक सा रहता है। जैसे- अचानक, अवश्य आदि।

उदाहरणः वह अचानक आ गया। इस वाक्य में अचानक शब्द मूल क्रिया विशेषण है।

यौगिक क्रिया विशेषणः

इस प्रकार के क्रिया विशेषण दो शब्दों के मेल से बनते हैं।

संज्ञा सेः  प्रेम से प्रेमपूर्वक, नम्र से नम्रतापूर्वक, नियम से नियमानुसार, जन्म से आजन्म आदि।

क्रिया सेः जाना से जाते हुए, सोना से सोते हुए, खाना से खाते हुए, रोना से रोते हुए आदि।

शब्दों को दोहराने सेः जल्दी-जल्दी, धीरे-धीरे, बार-बार, साफ-साफ इत्यादि।

विभिन्न शब्दों के मेल सेः रात-दिन, घर-बाहर, हर पल, एक साथ इत्यादि।

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