भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां (Emergency powers of the President of India)

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Emergency powers of the President of India

भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां (Emergency powers of the President of India)

भारतीय संविधान द्वारा भारत के राष्ट्रपति को निम्नांकित आपातकालीन शक्तियां प्राप्त हैः

  1. राष्ट्रीय आपात।
  2. राष्ट्रपति शासन।
  3. वित्तीय आपात।

राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद- 352 )

वर्ष 1978 ई0 में किये गये 44 वें भारतीय संविधान संशोधन अधिनियम के अन्तर्गत भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 352 के अनुसारः भारत का राष्ट्रपति निम्नांकित दशाओं में सम्पूर्ण भारत या भारत के कुछ क्षेत्रों या किसी विशेष क्षेत्र में राष्ट्रीय आपात की घोषणा कर सकता हैः

  1. मन्त्रिमण्डल के लिखित परामर्श पर।
  2. युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह होने पर।
  3. युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह होने की आशंका होने पर।
राष्ट्रीय आपातकाल की अवधिः
  1. राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपात की घोषणा किये जाने पर संसद के दोनों सदनों (लोकसभा तथा राज्सभा) के दो तिहाई बहुमत से स्वीकृत कर 06 माह के लिए लागू किया जायेगा । 06 माह  पूर्ण होने के पूर्व संसद द्वारा पुन: स्वीकृति प्रदान कर इसकी अवधि बढायी जा सकती है।
  2. लोकसभा में साधारण बहुमत से प्रस्ताव पारित कर के राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा समाप्त की जा सकती है।
  3. यदि राष्ट्रपति द्वारा की गयी राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को संसद के द्वारा एक माह के अन्दर स्वीकृति नही दी जाती है तो उक्त घोषणा स्वत: समाप्त हो जाती है।
  4. राष्ट्रपति जब चाहे राष्ट्रीय आपात की घोषणा वापस ले सकता है।
  5. राष्ट्रीय आपातकालीन घोषणा न्याय योग्य है जिसे सम्बन्धित न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है।
राष्ट्रीय आपातकाल का प्रभावः

राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है। संसद राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बना सकती है। लोकसभा का कार्यकाल 01 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। आवश्यकता पडने पर केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को प्रशासनिक शक्ति के प्रयोग के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा सकते हैं।

राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद- 356)

भारत के किसी प्रान्त में संवैधानिक तन्त्र विफल होने पर राज्यपाल की अनुशंसा पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद- 356 के अनुसारः भारत का राष्ट्रपति उस प्रान्त में राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है जिसे 02 माह के अन्दर संसद द्वारा बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है। राष्ट्रपति इसे कभी भी वापस ले सकता है उच्चतम न्यायालय द्वारा भी इसे हटाया जा सकता है।

राष्ट्रपति शासन की अवधिः

प्रत्येक 06 माह पर संसद द्वारा बहुमत से स्वीकृति प्रदान कर राष्ट्रपति शासन अधिकतम 3 वर्षों तक लगाया जा सकता है।

राष्ट्रपति शासन का प्रभावः  

संसद राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बना सकती है। राज्य विधानसभा को भंग या निलम्बित किया जा सकता है। राष्ट्रपति द्वारा राज्य की किसी भी संस्था का अधिग्रहण किया जा सकता है। संघात्मक ढांचा एकात्मक हो जाता है। अनुच्छेद 20 तथा 21 के अलावा अन्य मौलिक अधिकारों का निलम्बन  किया जा सकता है।

वित्तीय आपात (अनुच्छेद- 360)   

भारत में या उसके किसी प्रान्त में वित्तीय स्थायित्व या प्रत्यय संकट में होने पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद-  360 के अन्तर्गत वित्तीय आपात की घोषणा की जा सकती है जिसे 2 माह के अन्दर संसद के दोनों सदनों द्वारा द्वारा बहुमत से स्वीकृत किया जाना आवश्यक है । यदि ऐसी उदघोषणा के समय लोकसभा का विघटन हो गया है तो राज्यसभा द्वारा बहुमत से स्वीकृत किया जाएगा।

वित्तीय आपात की अवधिः  

एक बार संसद या राज्य सभा द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद राष्ट्रपति द्वारा स्वयं वापस लिए जाने तक वित्तीय आपात जारी रहता है।

वित्तीय आपात का प्रभावः 

राज्यों के धन विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया जा सकता है। अधिकारियों / कर्मचारियों का वेतन कम किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय आचरण के सम्बन्ध में राज्यों को दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

. भारत के राष्ट्रपति को निम्नांकित कितने प्रकार की आपातकालीन शक्तियां प्राप्त है-

भारत के राष्ट्रपति को 03 प्रकार की आपातकालीन शक्तियां प्राप्त है- राष्ट्रीय आपात, राष्ट्रपति शासन तथा वित्तीय आपात।

. भारतीय राष्ट्रपति को भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राष्ट्रीय आपातकाल लागू करने की शक्ति प्राप्त है-

अनुच्छेद 352 के तहत।

. भारत के किसी राज्य में संवैधानिक तन्त्र विफल होने पर भारतीय राष्ट्रपति को भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राष्ट्रपति शासन लागू करने की शक्ति प्राप्त है-

अनुच्छेद 356 के तहत।

. राष्ट्रपति शासन अधिकतम कितनी अवधि तक लगाया जा सकता है-

06-06 की अवधि में बढ़ाते हुए अधिकतम तीन वर्ष तक।

. राष्ट्रपति शासन एक बार में कितनी अवधि तक लगाया जा सकता है-

06 माह।

. राष्ट्रपति द्वारा की गयी राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को संसद द्वारा कितनी अवधि के भीतर स्वीकृति दिया जाना आवश्यक है-

एक माह।

. राष्ट्रपति द्वारा की गयी राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को संसद द्वारा 01 माह के भीतर स्वीकृति न दिए जाने पर क्या प्रभाव पड़ेगा-

राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा स्वत: समाप्त हो जायेगी।

. राष्ट्रपति शासन की घोषणा संसद द्वारा कितनी अवधि के अन्दर स्वीकृत किया जाना आवश्यक है-

02 माह।

. राष्ट्रपति शासन को कौन हटा सकता है-

उच्चतम न्यायालय तथा राष्ट्रपति।

. राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए राष्ट्रपति शासन को संसद द्वारा 02 माह के भीतर स्वीकृति न दिए जाने पर क्या प्रभाव पड़ेगा-

राष्ट्रपति शासन स्वत: समाप्त हो जायेगा।

. वित्तीय आपात भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत लगाया जाता है-

अनुच्छेद 360 के अन्तर्गत।

. वित्तीय आपात की अवधि क्या है-

एक बार संसद या राज्य सभा द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद राष्ट्रपति द्वारा स्वयं वापस लिए जाने तक वित्तीय आपात जारी रहता है।

. राष्ट्रपति द्वारा वित्तीय आपात उदघोषणा किये जाने पर यदि लोकसभा का विघटन हो गया है तो किसके द्वारा स्वीकृति प्रदान की जायेगी-

राज्यसभा द्वारा स्वीकृति प्रदान की जायेगी।

. राष्ट्रपति शासन को राष्ट्रपति कब वापस ले सकता है-

जब चाहे कभी भी वापस ले सकता है।

. किस आपात काल में संसद राज्य सूची के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है-

राष्ट्रपति शासन।

. राष्ट्रीय आपात काल को किस न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है-

उच्चतम न्यायालय।

. किस आपात काल में राज्य विधानसभा को भंग या निलम्बित किया जा सकता है-

राष्ट्रपति शासन।

. किस आपात काल में राष्ट्रपति द्वारा राज्य की किसी भी संस्था का अधिग्रहण किया जा सकता है-

राष्ट्रपति शासन में।

. किस आपात काल में संघात्मक ढांचा एकात्मक हो जाता है-

राष्ट्रपति शासन में।

. किस आपात काल में अनुच्छेद 20 तथा 21 के अलावा अन्य मौलिक अधिकारों का निलम्बन  किया जा सकता है-

राष्ट्रपति शासन में।

. किस आपात काल में राज्यों के धन विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किया जा सकता है-

वित्तीय आपात काल में।

. किस आपात काल में अधिकारियों / कर्मचारियों का वेतन कम किया जा सकता है-

वित्तीय आपात काल में।

. किस आपात काल में आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय आचरण के सम्बन्ध में राज्यों को दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं-

वित्तीय आपात काल में।