विद्युत धारा (ELECTRIC CURRENT)

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ELECTRIC CURRENT

विद्युत धारा (ELECTRIC CURRENT)

किसी चालक या सर्किट में विद्युत प्रवाह की दर को विद्युत धारा (Electric Current) कहते हैं। विद्युत धारा की दिशा वही होती है जो धनावेश की होती है अर्थात् विद्युत धारा की दिशा धनावेश से ऋणावेश की तरफ होती है। विद्युत धारा को i से प्रदर्शितकरते हैं।

विद्युत धारा को ( i) = Q / t           ( i = विद्युत धारा, Q= आवेश तथा t = समय )

विद्युत धारा का S.I. मात्रक एम्पियर है । यह एक अदिश राशि है।

ठोस चालकों में विद्युत धारा का प्रवाह इलेक्ट्रानों के एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थान्नान्तरण के कारण होता है।

द्रवों के विलयन तथा गैसों में विद्युत धारा का प्रवाह आयनों की गति के कारण होता है।

एक एम्पियर विद्युत धारा क्या है?

किसी चालक तार में 6.25 × 1818 इलेक्ट्रान प्रति सेकेण्ड एक सिरे से प्रविष्ट होकर दूसरे सिरे से निकलना एक एम्पियर कहलाता है । एम्पियर विद्युत धारा की इकाई है।

या

किसी चालक तार में प्रति सेकेण्ड एक कूलाम आवेश प्रवाहित होना एक एम्पियर कहलाता है।

विद्युत धारा कितने प्रकार की होती है?

विद्युत धारा 02 प्रकार की होती हैः

1-प्रत्यावर्ती विद्युत धारा या अल्टर्नेटिंग करेन्ट (Alternating Current)।

2-दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current)।

प्रत्यावर्ती विद्युत धारा या अल्टर्नेटिंग करेन्ट (Alternating Current) क्या है?

वह विद्युत धारा जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ बदलते रहते हैं, प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (Alternating Current) कहलाती है। इसे A.C. प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार की विद्युत धारा में धारा का परिमाण अर्थात् मात्रा तथा दिशा समय-समय पर बदलती रहती है। पावरहाउस से विद्युत तारों के माध्यम से घरों में आने वाली विद्युत धारा इसी प्रकार की विद्युत धारा है।

दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current) क्या है?

वह विद्युत धारा जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ स्थिर रहते हैं, दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current) कहलाती है। इसे D.C. से प्रदर्शित करते हैं। इस प्रकार की विद्युत धारा में धारा का परिमाण अर्थात् मात्रा तथा दिशा अपरिवर्तित रहती है। इस प्रकार की विद्युत धारा बैट्री, जनरेटर तथा D.C. रेक्टिफायर इत्यादि से उत्पन्न होती है।

घरों या आफिसों में लगे इन्वर्टर का क्या कार्य है?

प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में तथा दिष्ट धारा को प्रत्यावर्ती धारा में बदलना।

विद्युत धारा का तापीय प्रवाह क्या है?

जब हम किसी चालक को विद्युत ऊर्जा देते हैं तब ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में बदल जाता है जिससे वह चालक गर्म हो जाता है । इसे ही विद्युत धारा का तापीय प्रवाह कहते हैं।

विद्युत धारा के तापीय प्रवाह का उपयोग विद्युत बल्ब, हीटर, प्रेस (आइरन), निमजन छड़, केतली आदि में होता है।

विद्युत बल्ब का फिलामेन्ट किस धातु का बना होता है?

टंगस्टन धातु का बना होता है।

विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव क्या है?

किसी चालक तार या सर्किट में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों तरफ चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है जिसे विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते हैं।

विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव का उपयोग टेलीफोन, घण्टी आदि में किया जाता है।

प्रतिरोध (Resistance) क्या है?

किसी चालक में विद्युत धारा के प्रवाहित होने पर चालक के परमाणुओं एवं अन्य कारकों के द्वारा उत्पन्न किए गए व्यवधान को ही प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं। इसे R से प्रदर्शित करते हैं। प्रतिरोध का S.I. मात्रक ओम है।

ओम का नियम (Ohm,s Law) क्या है?

यदि किसी चालक की भौतिक अवस्था जैसे- ताप आदि में कोई परिवर्तन न हो तो चालक के सिरों पर लगाया गया विभवान्तर उसमें प्रवाहित विद्युत धारा के अनुत्क्रमानुपाती होता है । अर्थात् विद्युत धारा बढ़ने पर विभवान्तर बढ़ता है तथा विद्युत धारा घटने पर विभवान्तर घट जाता है।

ओमीय प्रतिरोध (Ohmic Registance) क्या है?

वे चालक जो ओम के नियम का पालन करते हैं, उनका प्रतिरोध ओमीय प्रतिरोध (Omhic Registance) कहलाता है। जैसे- मैंगनीज का तार।

अन ओमीय प्रतिरोध (Non- Omhic Registance) क्या है?

वे चालक जो ओम के नियम का पालन नही करते हैं, उनका प्रतिरोध अन ओमीय प्रतिरोध (Non-Omhic Registance) कहलाता ह । जैसे- डायोड व ट्रायोड बल्ब का प्रतिरोध आदि।

विशिष्ट प्रतिरोध (Special Registance) क्या है?

किसी चालक तार का प्रतिरोध उसकी लम्बाई के अनुत्क्रमानुपाती एवं उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है तो उसे उस चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (Special Registance) कहते हैं ।

प्रतिरोधों का संयोजन कितने प्रकार का होता है?

प्रतिरोधों का संयोजन 02 प्रकार का होता हैः

1-श्रेणी क्रम (Series Combination)।

2-समान्तर क्रम (Parallel Combination)।

श्रेणी क्रम (Series Combination

इसमे संयोजित प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध समस्त प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।

समान्तर क्रम (Parallel Combination)

इसमे संयोजित प्रतिरोधों का समतुल्य प्रतिरोध का व्युत्क्रम उनके प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराहर होता है।

चालकता (Conductance) क्या है?

किसी चालक के प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस चालक की चालकता (Conductance) कहते हैं । इसे G से प्रदर्शित करते हैं।

अर्थात् G = 1 / R         ( जहां G= चालकता तथा R= प्रतिरोध )

विशिष्ट चालकता (Special Conductance) क्या है?

किसी चालक के विशिष्ट प्रतिरोध के व्युत्क्रम को उस चालक की विशिष्ट चालकता (Special Conductance) कहते हैं।

विद्युत शक्ति क्या है?

किसी विद्युत परिपथ में ऊर्जा के क्षय या व्यय होने की दर विद्युत शक्ति कहलाती है। इसका S.I. मात्रक वाट है।

एक यूनिट विद्युत ऊर्जा क्या है?

एक किलोवाट विद्युत शक्ति के परिपथ में एक घण्टे में व्यय विद्युत ऊर्जा को एक यूनिट विद्युत ऊर्जा कहते हैं। इसे एक किलोवाट घण्टा भी कहा जाता है।

यूनिट या किलोवाट घण्टा  = वोल्ट × एम्पियर  × घण्टा / 1000  = वाट  × घण्टा / 1000

( वाट = वोल्ट × एम्पियर  )।

. विद्युत धारा (Electric Current) क्या है?     

किसी चालक या सर्किट में विद्युत प्रवाह की दर।

. विद्युत धारा (Electric Current) की दिशा किधर होती है?

धनावेश से ऋणावेश की तरफ होती है।

. विद्युत धारा का S.I. मात्रक क्या है?

एम्पियर है।

. विद्युत धारा किस प्रकार की राशि है?

अदिश राशि है।

. द्रवों तथा गैसों में विद्युत धारा का प्रवाह किस कारण होता है?

आयनों की गति के कारण होता है।

. वह कौन सी विद्युत धारा है जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ बदलते रहते हैं?

प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (Alternating Current)।

. पावरहाउस से विद्युत तारों के माध्यम से घरों में आने वाली विद्युत धारा किस प्रकार की विद्युत धारा है?

प्रत्यावर्ती विद्युत धारा (Alternating Current)।

. वह कौन सा विद्युत धारा है जिसमें विद्युत धारा का परिमाण व दिशा दोनों समय के साथ स्थिर अर्थात् अपरिवर्तित रहते हैं?

दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट (Direct Current)।

. दिष्ट धारा या डायरेक्ट करेन्ट  के स्रोत कौन-कौन हैं?

बैट्री, जनरेटर तथा D.C. रेक्टिफायर इत्यादि।

. विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव का उपयोग किसमें किया जाता है?

टेलीफोन, घण्टी आदि में किया जाता है।

. प्रतिरोध को किस संकेत से प्रदर्शित करते हैं?

R से प्रदर्शित करते हैं।

. प्रतिरोध का S.I. मात्रक क्या है?

ओम।

. विद्युत धारा का विभवान्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

विद्युत धारा बढ़ने पर विभवान्तर बढ़ता है तथा विद्युत धारा घटने पर विभवान्तर घट जाता है। अर्थात विभवान्तर विद्युत धारा के अनुत्क्रमानुपाती होता है।