गुरुत्वाकर्षण (GRAVITATION)

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Chalkboard with science Physics formulas
Chalkboard with science formulas. Physics background

गुरुत्वाकर्षण (GRAVITATION)

गुरुत्वाकर्षण बल (GravitationForce)

जब दो कण या पिण्ड बल लगाकर एक दूसरे को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं तो इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitatyion Force) कहते हैं। हमारी पृथ्वी अपने इसी गुण के कारण ही किसी वस्तु को अपनी तरफ खींचती है। किसी वस्तु को अपनी तरफ खींचने में पृथ्वी द्वारा लगाये जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व बल कहते हैं।

गुरुत्व केन्द्र (Gravity Centre)

वह बिन्दु जिस पर किसी वस्तु का समस्त भार कार्य करता है, गुरुत्व केन्द्र कहलाता हैं। किसी वस्तु की स्थिरता उसके गुरुत्व केन्द्र की स्थिति पर निर्भर करती है। किसी वस्तु का गुरुत्व केन्द्र उस वस्तु में भी हो सकता है तथा उस वस्तु के बाहर भी हो सकता है। जिन वस्तुओं का गुरुत्व केन्द्र नीचे तथा आधार चौंड़ा होता है वे वस्तुएं अधिक स्थायी होती हैं अर्थात् उनका सन्तुलन अधिक स्थायी होता है।

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियमः

ब्रम्हाण्ड का प्रत्येक पिण्ड दूसरे पिण्ड को अपनी तरफ आकर्षित करता है जिसे आकर्षण बल कहते हैं। दो पिण्डों के बीच कार्य करने वाला यह आकर्षण बल दोनों पिण्डों के द्रव्यमान के अनुत्क्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युक्रमानुपाती होता है।

अर्थात्  F = G × m1 × m2 / r2

(G = सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक, m1 = पहले पिण्ड का द्रव्यमान,  m2 = दूसरे पिण्ड का द्रव्यमान, r = दोनों पिण्डों के बाच की दूरी तथा G का मान 6.77 × 10-11 न्यूटन मीटर2 / किग्रा02 है )।

गुरुत्व (Gravity)

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार दो पिण्डों के मध्य एक आकर्षण बल कार्य करता है। यदि इनमें से एक पिण्ड पृथ्वी हो तो इस बल को गुरुत्व (Gravity) कहते हैं। अर्थात गुरुत्वाकर्षण वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केन्द्र की तरफ खींचती है।

गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity)

गुरुत्व बल के कारण जो त्वरण उत्पन्न होता है उसे गुरुत्वीय त्वरण या गुरुत्व जनित त्वरण कहते हैं।

अथवा

पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण किसी वस्तु के वेग में प्रति सेकेण्ड होने वाली वृद्धि को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।

गुरुत्वीय त्वरण को g से प्रदर्शित किया जाता है जिसका मान 9.8 मीटर प्रति सेकेण्ड2 होता है। गुरुत्व जनित त्वरण वस्तु के आकार, द्रव्यमान, रूप आदि पर निर्भर नहीं करता है।

पृथ्वी की सतह से ऊपर या नीचे जाने पर g का मान घटता है।

पृथ्वी के ध्रुव पर g का मान अधिकतम तथा विषुवत रेखा पर g का मान न्यूनतम होता है।

पृथ्वी की घूर्णन गति घटने पर g का मान बढ़ जाता है तथा घूर्णन गति बढ़ने पर g का मान कम हो जाता है।

लिफ्ट में पिण्ड या व्यक्ति का भारः

जब लिफ्ट ऊपर की तरफ जाती है तो लिफ्ट में मौजूद पिण्ड का भार बढ़ा हुआ प्रतीत होता है तथा जब लिफ्ट नीचे की तरफ आती है तो पिण्ड का भार घटा हुआ प्रतीत होता है।

जब लिफ्ट एक समान वेग से ऊपर या नीचे गति करती है तो लिफ्ट में मौजूद पिण्ड कि भार में कोई परिवर्तन नहीं प्रतीत होता है।

यदि लिफ्ट के नीचे उतरते समय लिफ्ट का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण से अधिक हो तो लिफ्ट में मौजूद पिण्ड उसकी फर्श से उठकर उसकी छत से जा टकरायेगा।

यदि नीचे उतरते समय लिफ्ट की डोरी टूट जाए तो वह मुक्त पिण्ड की तरह नीचे गिरती है। ऐसी दशा में लिफ्ट में मौजूद पिण्ड का भार शून्य होता है।

पलायन वेग (Escope Velocity)

किसी वस्तु को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए तथा अन्तरिक्ष में प्रक्षेपित करने के लिए जिस वेग की आवश्यकता पड़ती है उसे पलायन वेग (Escope Velocity) कहते हैं।

पलायन वेग(Escope Velocity) 11.2 किलोमीटर / सेकेण्ड होता है।

यदि किसी वस्तु को 11.2 किलोमीटर / सेकेण्ड या इससे अधिक वेग से ऊपर की ओर फेंका जाता है तो वह वस्तु पृथ्वी तल पर वापस कभी नहीं आती है।

यदि किसी उपग्रह की चाल को 41% बढ़ा दिया जाए तो वह उपग्रह अपनी कक्षा को छोड़कर पलायन कर जाएगा।

ग्रह (Planet)

वे आकाशीय पिण्ड जो सूर्य के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं, ग्रह (Planet) कहलाते हैं। सौरमण्डल में मुख्यतया कुल आठ ग्रह (Planet) है जो सूर्य से दूरी के बढ़ते क्रम में इस प्रकार हैं– बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेपच्यून। इस प्रकार सूर्य के सबसे निकट का ग्रह (Planet) बुध तथा सबसे दूर का ग्रह (Planet) नेपच्यून है।

केप्लर के नियमः

केप्लर ने ग्रहों की गति के सम्बन्ध में 3 नियम प्रतिपादित किये जो निम्नवत हैः

  1. प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों तरफ दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करता है तथा सूर्य कक्षा के फोकस बिन्दु पर स्थित होता है।
  2. प्रत्येक ग्रह का क्षेत्रीय नियत रहता है जिसके कारण जब ग्रह सूर्य के निकट होता है तो उसका वेग बढ़ जाता है तथा जब सूर्य से दूर होता है तो उसका वेग घट जाता है।
  3. सूर्य के चारों तरफ ग्रह को एक चक्कर लगाने में जितना समय लगता है उसे उस ग्रह का परिक्रमण काल कहते हैं। परिक्रमण काल को T से प्रदर्शित किया जाता है। परिक्रमण काल का वर्ग (T2) ग्रह की सूर्य से औसत दूरी के घन (r3) के अनुक्रमानुपाती होता है । अर्थात सूर्य से अधिक दूर के ग्रहों का परिक्रमण काल अधिक होता है तथा सूर्य से कम दूरी के ग्रहों का परिक्रमण काल कम होता है।

सूर्य के सबसे निकट स्थित ग्रह बुध का परिक्रमण काल सबसे कम (88 दिन) तथा सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह नेपच्यून (वरुण) का परिक्रमण काल सबसे अधिक (165 वर्ष) है।

उपग्रह (Satellite)

किसी ग्रह के चारों तरफ परिक्रमा करने वाले पिण्ड को उस ग्रह का उपग्रह(Satellite) कहते हैं।

चन्द्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है। इस प्रकार चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है।

उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite)

  • किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite) उसकी पृथ्वी तल से ऊंचाई पर निर्भर करती है। कोई उपग्रह पृथ्वी तल से जितना अधिक दूर होता है उसकी कक्षीय चाल (Orbital Speed) उतनी कम होती है तथा जितना नजदीक होता है उसकी कक्षीय चाल (Orbital Speed) उतनी अधिक होती है। इस प्रकार किसी उपग्रह की कक्षीय चाल पृथ्वी तल से उसकी दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
  • किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed) उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती। एक ही त्रिज्या की कक्षा में भिन-भिन्न उपग्रहों की चाल समान होती है।

पृथ्वी तल के निकटतम चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite)  

पृथ्वी तल के निकटतम चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite) लगभग 8 किलोमीटर प्रति सेकेण्ड होती है।

उपग्रह का परिक्रमण काल (Period of revolution of a Satellite)

किसी उपग्रह द्वारा अपनी कक्षा में पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में जितना समय लगता है उसे उस उपग्रह का परिक्रमण काल (Period of revolution of a Satellite) कहते हैं।

किसी उपग्रह का परिक्रमण काल (Period of revolution of any Satellite) पृथ्वी तल से उसकी ऊंचाई पर निर्भर करता है जो उपग्रह पृथ्वी तल से जितना अधिक दूर होता है उसका परिक्रमण काल उतना ही अधिक होता है तथा जो उपग्रह पृथ्वी से जितना कम दूर होता है उसका परिक्रमण काल उतना ही कम होता है । इस प्रकार किसी उपग्रह का परिक्रमण काल पृथ्वी से उसकी दूरी या ऊंचाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

परिक्रमण काल = कक्षा की परिधि / कक्षीय चाल।

किसी उपग्रह का परिक्रमण काल उसके द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है।

भू-स्थायी उपग्रह (Geo-Stationary Satellite)

ऐसा उपग्रह जो पृथ्वी के अक्ष के लम्बवत विषुवतीय रेखीय तल में पश्चिम से पूरब की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा जिसका परिक्रमण काल पृथ्वी के परिक्रमण काल (24 घण्टे) के बराबर होता है, उसे भू-स्थायी उपग्रह (Geo-Stationary Satellite) कहते हैं। भू-स्थायी उपग्रह (Geo-Stationary Satellite) पृथ्वी तल से लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर रहकर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। भू-स्थायी उपग्रह का प्रयोग रेडियो प्रसारण, दूरसंचार तथा मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है।

. यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से 17 गुनी अधिक चाल से घूमने लगे तो g के मान में क्या परिवर्तन होगा?

यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से 17 गुनी अधिक चाल से घूमने लगे तो भूमध्य रेखा पर रखी वस्तु का भार शून्य हो जाएगा अर्थात वहां पर भारहीनता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। ध्रुव पर g के मान में कोई परिवर्तन नहीं होगा। ऐसी स्थिति में दिन की अवधि 24 घण्टे से घटकर 1.4 घण्टे यानी 84 मिनट हो जाएगी।

. यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो g के मान में क्या परिवर्तन हो सकता है ?

यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो ध्रुवों को छोड़कर शेष सभी स्थानों पर g जी का मान बढ़ जाएगा।

. भारी वस्तु हल्की वस्तु की अपेक्षा पृथ्वी की सतह पर पहले क्यों पहुंचती है?

भारी वस्तु का त्वरण हल्की वस्तु की अपेक्षा अधिक होता है जिसके कारण भारी वस्तु हल्की वस्तु की अपेक्षा पृथ्वी की सतह पर पहले पहुंचती है।

. भूमध्य रेखा पर g का मान कितना होता है?

भूमध्य रेखा पर g का मान न्यूनतम होता है।

. भूमध्य रेखा तथा ध्रुवों पर g के मान में कितना अन्तर होता है?

3.4 सेंटीमीटर प्रति सेकेण्ड2

. द्रव्यमान (Mass) क्या है?

किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा को उस वस्तु का द्रव्यमान (Mass) कहते हैं।

. भार (Weight) क्या है?

पृथ्वी जिस बल से किसी वस्तु को अपनी तरफ खींचती है उसे उस वस्तु का भार (Weight) कहते हैं।

. द्रव्यमान (Mass) तथा भार (Weight) में क्या अन्तर है?

पृथ्वी के केन्द्र से भिन्न-भिन्न दूरियों पर वस्तु के भार में परिवर्तन आ जाता है अर्थात किसी वस्तु का भार भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न होता है जबकि द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर नियत अर्थात अपरिवर्तित रहता है।

. बल युग्म क्या है?

जब किसी पिण्ड पर बराबर तथा विपरीत समान्तर बल कार्य करते हैं तो ऐसे बलों को बल युग्म कहा जाता है । इन दोनों बलों की क्रिया की दिशा अलग अलग होनी चाहिए।

. पलायन वेग (Escope Velocity) क्या है?

किसी वस्तु को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए तथा अन्तरिक्ष में प्रक्षेपित करने के लिए जिस वेग की आवश्यकता पड़ती है उसे पलायन वेग (Escope Velocity) कहते हैं।

. पृथ्वी का पलायन वेग कितना है?

पलायन वेग(Escope Velocity) 11.2 किलोमीटर / सेकेण्ड होता है।

. क्या होगा यदि किसी वस्तु को 11.2 किलोमीटर / सेकेण्ड या इससे अधिक वेग से ऊपर की ओर फेंका जाय?

वस्तु पृथ्वी तल पर वापस कभी आयेगी।

. क्या होगा यदि किसी उपग्रह की चाल को 41% बढ़ा दिया जाए?

उपग्रह अपनी कक्षा को छोड़कर पलायन कर जाएगा ।

. ग्रह (Planet) क्या हैं?

सूर्य के इर्द-गिर्द घूमने वाले आकाशीय पिण्ड।

. सूर्य का सबसे निकटवर्ती तथा दूरस्थ ग्रह कौन सा है?

सूर्य के सबसे निकट का ग्रह (Planet) बुध तथा सबसे दूर का ग्रह (Planet) नेपच्यून है।

. ग्रहों की गति का नियम किसने प्रतिपादित किया था ?

ग्रहों की गति का नियम केप्लर ने प्रतिपादित किया था।

. किस ग्रह को आई0एम0यू0 ने ग्रह  की श्रेणी से निकाल दिया है?

यम। पहले सूर्य का सबसे दूरस्थ ग्रह यम था जिसे ग्रह की श्रेणी से निकाल दिए जाने के पश्चात सूर्य का सबसे दूरस्थ ग्रह नेपच्यून (वरुण) है।

. पृथ्वी तल के निकटतम चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital Speed of Satellite)  कितनी होती है?

लगभग 8 किलोमीटर प्रति सेकेण्ड होती है।

. पृथ्वी के निकटतम चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल कितना होता है?

पृथ्वी के निकटतम चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल 1 घण्टा 24 मिनट होता है।

. भू-स्थायी उपग्रह (Geo-Stationary Satellite) का परिक्रमण काल कितना होता है?

पृथ्वी के परिक्रमण काल के बराबर अर्थात 24 घण्टे होता है।

. भू-स्थायी उपग्रह किस दिशा में परिक्रमा करता है?

पश्चिम से पूरब की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

. भू-स्थायी उपग्रह का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता है?

रेडियो प्रसारण, दूरसंचार तथा मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है ।

. भू-स्थायी उपग्रह पृथ्वी तल से कितनी ऊंचाई पर रह कर पृथ्वी की परिक्रमा करता है?

लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर।

. गुरुत्वाकर्षण बल (GravitationForce) क्या है?

जब दो कण या पिण्ड बल लगाकर एक दूसरे को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं तो इस आकर्षण बल को गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitatyion Force) कहते हैं।

. पृथ्वी किस गुण के कारण किसी वस्तु को अपनी तरफ खींचती है?

गुरुत्वाकर्षण बल।

. गुरुत्व बल क्या है?

पृथ्वी द्वारा किसी वस्तु को अपनी तरफ खींचने में लगाये जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को गुरुत्व बल कहते हैं।

. गुरुत्व केन्द्र (Gravity Centre) क्या है?

वह बिन्दु जिस पर किसी वस्तु का समस्त भार कार्य करता है, गुरुत्व केन्द्र कहलाता हैं ।

. किसी वस्तु की स्थिरता किस पर निर्भर करती है?

किसी वस्तु की स्थिरता उसके गुरुत्व केन्द्र की स्थिति पर निर्भर करती है।

. किसी वस्तु का गुरुत्व केन्द्र कहां पर होता है?

किसी वस्तु का गुरुत्व केन्द्र उस वस्तु में भी हो सकता है तथा उस वस्तु के बाहर भी हो सकता है।

. किन वस्तुओं का सन्तुलन अधिक स्थायी होता है?

जिन वस्तुओं का गुरुत्व केन्द्र नीचे तथा आधार चौंड़ा होता है उनका सन्तुलन अधिक स्थायी होता है।

. न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम क्या है?

ब्रम्हाण्ड का प्रत्येक पिण्ड दूसरे पिण्ड को अपनी तरफ आकर्षित करता है जिसे आकर्षण बल कहते हैं। दो पिण्डों के बीच कार्य करने वाला यह आकर्षण बल दोनों पिण्डों के द्रव्यमान के अनुत्क्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युक्रमानुपाती होता है।

. गुरुत्व (Gravity) क्या है?

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार दो पिण्डों के मध्य एक आकर्षण बल कार्य करता है। यदि इनमें से एक पिण्ड पृथ्वी हो तो इस बल को गुरुत्व (Gravity) कहते हैं।

. गुरुत्वीय त्वरण (Acceleration due to Gravity) क्या है?

पृथ्वी के गुरुत्व बल के कारण किसी वस्तु के वेग में प्रति सेकेण्ड होने वाली वृद्धि को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं।

गुरुत्वीय त्वरण को g से प्रदर्शित किया जाता है जिसका मान 9.8 मीटर प्रति सेकेण्ड2 होता है।

. पृथ्वी की सतह से ऊपर या नीचे जाने पर g के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है?

g का मान घटता है।

. g का मान कहां पर अधिकतम तथा कहां पर न्यूनतम होता है?

पृथ्वी के ध्रुव पर g का मान अधिकतम तथा विषुवत रेखा पर g का मान न्यूनतम होता है।

. पृथ्वी की घूर्णन गति का g के मान पर क्या प्रभाव पड़ता है?

पृथ्वी की घूर्णन गति घटने पर g का मान बढ़ जाता है तथा घूर्णन गति बढ़ने पर g का मान कम हो जाता है ।

. यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से 17 गुनी अधिक चाल से घूमने लगे तो g के मान में क्या परिवर्तन होगा?

यदि पृथ्वी अपनी वर्तमान कोणीय चाल से 17 गुनी अधिक चाल से घूमने लगे तो भूमध्य रेखा पर रखी वस्तु का भार शून्य हो जाएगा।

ध्रुव पर g के मान में कोई परिवर्तन नहीं होगा। ऐसी स्थिति में दिन की अवधि 24 घण्टे से घटकर 1.4 घण्टे यानी 84 मिनट हो जाएगी।

. यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो g के मान में क्या परिवर्तन हो सकता है?

यदि पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूमना बन्द कर दे तो ध्रुवों को छोड़कर शेष सभी स्थानों पर g जी का मान बढ़ जाएगा।

. भारी वस्तु हल्की वस्तु की अपेक्षा पृथ्वी की सतह पर पहले क्यों पहुंचती है?

भारी वस्तु का त्वरण हल्की वस्तु की अपेक्षा अधिक होता है जिसके कारण भारी वस्तु हल्की वस्तु की अपेक्षा पृथ्वी की सतह पर पहले पहुंचती है।

. भूमध्य रेखा पर g का मान कितना होता है?

भूमध्य रेखा पर g का मान न्यूनतम होता है।

. भूमध्य रेखा तथा ध्रुवों पर g के मान में कितना अन्तर होता है?

3.4 सेंटीमीटर प्रति सेकेण्ड2