भौतिक विज्ञान (Physics)

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Chalkboard with science Physics formulas
Chalkboard with science formulas. Physics background

भौतिक विज्ञान (Physics)

भौतिक विज्ञान क्या है ?

What is Physics ?

भौतिक विज्ञान विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पदार्थ तथा ऊर्जा की प्रकृति एवं गुणों का अध्ययन किया जाता है। भौतिक विज्ञान में पदार्थ के रूप में परमाणु संरचना, बिजली, चुम्बकत्व, ध्वनि, प्रकाश आदि सम्मिलित हैं।अल्वर्ट आइंन्सटीन को भौतिक विज्ञान का जनक (Father of Physics) कहा जाता है।

भौतिक विज्ञान की शाखाएः

( Branches of Physics)

कलासिकल फिजिक्स (Classical Physics)

इस शाखा के अन्तर्गत मुख्यतया ऊर्जा एवं पदार्थ के नियमों का अध्ययन किया जाता है। इसमें पदार्थ एवं ऊर्जा को अलग-अलग मात्रा के रूप में जाना जाता है। इस शाखा के मुख्य वैज्ञानिक सर आइजक न्यूटन तथा जेम्स क्लार्क मैक्सवेल हैं।

आधुनिक भौतिकी ( Modern Physics)

इस शाखा के अन्तर्गत मुख्यतया थ्यौरी आंफ रिलेटिविटी तथा क्वांटम मकैनिज्म का अध्ययन किया जाता है और ऊर्जा एवं पदार्थ को एक दूसरे का अलग-अलग रूप माना जाता है।

परमाणु भौतिकी ( Nuclear Physics)

इस शाखा के अन्तर्गत परमाणु नाभिक संरचना, कोर्सेज तथा गुणों का अध्ययन किया जाता है। वर्तमान समय में विज्ञान की यह शाखा काफी विस्तृत हो चुकी है तथा इसका उपयोग न्यूक्लियर वैपन, दवाओं,मैंग्नेटिक रेजोनेंन्स, एग्रीकल्चर आइसोटोप आदि के लिए किया जा रहा है।

यान्त्रिक भौतिकी ( Machanics Physics)

भौतिकी की इस शाखा की दो शाखाएं हैः क्लासिकल यान्त्रिकी (Classical machanics) तथा क्वांटम यान्त्रिकी (Quantam machanics)।

क्लासिकल यान्त्रिकी (Classical machanics) के अन्तर्गत वस्तुओं की गतियों तथा गति के कारणों का अध्ययन किया जाता है।

क्वांटम यान्त्रिकी (Quantam machanics) के अन्तर्गत पदार्थ के सबसे छोटे कणों इलेक्ट्रान, प्रोट्रान व न्यूट्रान के गुणों का अध्ययन किया जाता है।

ध्वनिक भौतिकी (Acoustics Physics)

इस शाखा के अन्तर्गत मुख्यतया ध्वनि का अध्ययन किया जाता है। पदार्थ की अवस्थाओं ठोस, द्रव व गैस का भी अध्ययन किया जाता है।

परमाणु भौतिकी (Atomic Physics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत परमाणु संरचना का अध्ययन किया जाता है।

बायोफिजिक्स (Biophysics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत भौतिकी सिध्दान्तों एवं तकनीकों की सहायता से जैविक घटना (जीवों की जैविक समस्याओं) तथा जैविक समस्याओं के अन्तः विषय अर्थात् जीवों में अणुओं की संरचना का अध्ययन किया जाता है।

थर्मोडायनेमिक्स (Thermodynemics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत ताप, ऊष्मा एवं ऊर्जा के सम्बन्ध में अध्ययन किया जाता है।

एस्ट्रोफिजिक्स (Astrophysics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत ब्रह्माण्ड अर्थात आकाशगंगा, तारों व ग्रहों का अध्ययन किया जाता है।

जियोफिजिक्स (Geophysics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत पृथ्वी की संरचना, आकृति, गुरुत्वाकर्षण बल, मैग्मा तथा भूकम्प आदि का अध्ययन किया जाता है।

आप्टिक्स भौतिकी (Optics Physics)

भौतिकी की इस शाखा के अन्तर्गत इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का अध्ययन किया जाता है।

कुछ प्रमुख राशियां तथा उनके मात्रकः

राशियां मात्रक  प्रतीक
ताप केल्विन  K
ज्योति तीव्रता कैंडेला Cd
विद्युत धारा एम्पियर   A
पदार्थ की मात्रा मोल mol
समतल कोण रेडियन   r
कार्य जूल J
शक्ति वाट W
बल न्यूटन N
त्वरण मीटर/(सेकेण्ड )२ m/s2
लम्बाई मीटर   m
द्रव्यमान किलोग्राम Kg
घन कोण स्टेरेडियन sr
आवृत्ति हर्ट्ज़ Hz
चाल मी० / से० m/s
दाब पास्कल Pa
घनत्व किग्रा० मी०-3 Kg m-3
समय सेकेण्ड S

 

बहुत लम्बी दूरी मापने  के लिए प्रकाश वर्ष का प्रयोग किया जाता है अर्थात प्रकाश वर्ष दूरी का मात्रक है|

1 प्रकाश वर्ष =  9.46 × 1015  मीटर|

दूरी मापने  की सबसे बड़ी ईकाई पारसेक है|

1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष = 3.०८ × 10 16  मीटर|

CGS पद्घति में बल का मात्रक डाइन  है|     1 न्यूटन = 10 5 डाइन|

CGS पद्घति में  कार्य का मात्रक अर्ग है|  जब कि SI पद्घति में  कार्य का मात्रक जूल है|

1 जूल = 10 7  अर्ग|

अदिश राशिः

वे भौतिक रशिया जिनमे केवल परिमाण होता है दिशा नही होती अदिश राशि कहते हैं| जैसे – द्रव्यमान , चाल, आयतन, कार्य, समय , उर्जा , दूरी, चाल|

सदिश राशिः

वे भौतिक राशि जिनमे परिमाण के साथ दिशा भी होती है सदिश राशि कहते हैं|जैसे – वेग, विस्थापन, बल, त्वरण ,विस्थापन, वेग , संवेग , आवेग ,बल आघूर्ण|

दूरीः

किसी समयांतराल  में तय किये गये मार्ग की लम्बाई को दूरी कहते है। यह सदैव धनात्मक होती है |

 विस्थापनः

किसी निशित दिशा में दो बिन्दुओं के बीच की लम्बवत दूरी को विस्थापन कहते हैं|

चालः

किसी वस्तु द्वारा प्रति सेकेण्ड तय की गयी दूरी को चाल कहते हैं|  चाल =दूरी/ सम |

 वेगः

किसी वस्तु द्वारा  किसी निश्चित दिशा में प्रति सेकेण्ड तय की गयी दूरी को वेग  कहते हैं| इसका SI पद्धति में मात्रक मी० /से०  है|

 त्वरणः

किसी वस्तु के वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं| इसका SI पद्धति में मात्रक मी० /से०2  है| वेग बढने पर त्वरण धनात्मक तथा वेग घटने पर ऋणात्मक होता है|

वृत्तीय गतिः

जब कोई वस्तु वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उसकी गति को वृत्तीय गति कहते हैं| इसमें वेग की दिशा प्रत्येक बिंदु पर बदल जाती है| यह एक त्वरित गति होती है|

गुरुत्व केंद्रः

किसी वस्तु का गुरुत्व केंद्र वह बिंदु है जहाँ पर वस्तु का समस्त भार कार्य कर्ता है|

वस्तु का भार गुरुत्व केंद्र से ठीक नीचे की ओर कार्य कर्ता है|

 शक्तिः

कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं|इसका मात्रक वाट एवं अश्व शक्ति है|

शक्ति = कार्य / समय|

1 अश्व शक्ति = ७४६ वाट|

अभिकेन्द्रीय बलः

जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उस पर वृत्त के

केंद्र की ओर कार्य करने वाले बल को अभिकेन्द्रीय बल कहते हैं| इस बल के आभाव में वस्तु

वृत्ताकार मार्ग पर गति नही कर सकती है|

अभिकेन्द्रीय बल F = mv2 /r (जहाँ m= वस्तु का द्रव्यमान , v = वेग , r = वृत्त की त्रिज्या )|

अपकेन्द्रीय बलः

जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो उस पर वृत्त के केंद्र की तरफ से लगने वाले बल को अपकेन्द्रीय बल कहते हैं| इस बल की दिशा अभिकेन्द्रीय बल

के विपरीत होती है|

उदहारण -दूध से मक्खन निकालने  की मशीन , कपड़ा सुखाने की मशीन , मौत के कुँए में साइकिल चलाना आदि|

संवेगः

किसी वस्तु  के द्रव्यमान एवं वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं|

जड़त्वः

बाहरी बल के आभाव में किसी वस्तु की विश्रमावस्था या समान गति की अवस्था बनाये रखने की प्रवृत्ति को जडत्व कहते हैं|

उदहारणः

  1. ठहरी हुयी मोटर साइकिल , बस या रेलगाड़ी के अचानक चल पड़ने पर उस पर बैठे यात्री पीछे की ओर झुक जाते हैं|
  2. चलती हुयी मोटर कार के अचानक रुकने पर उसमे बैठे यात्री आगे की ओर झुक जाते हैं|
  3. कम्बल को पकड़ कर डंडे से पीटने पर धूल के कण गिर पड़ते हैं|
  4. दौड़ते समय धावक अचानक रुकने पर आगे की ओर झुक जाता है|

न्यूटन के गति के नियमः   

न्यूटन ने गति  के 3 नियम बनाये हैः

  1. न्यूटन के गति का प्रथम नियमः

यदि कोई वस्तु एक समान चाल से एक सीधी रेखा में गतिशील  है तो वह वैसी ही गतिशील रहेगी ओर यदि विराम अवस्था  में  तो वह विराम अवस्था में ही रहेगी जब तक उस पर कोई बाहय बल लगा कर उसकी अवस्था में परिवर्तन न किया जाये|

इस नियम को गैलिलियो का नियम या जडत्व  का नियम भी कहते हैं|

  1. न्यूटन के द्वितीय गति नियमः

किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस वस्तु पर आरोपित बल के समानुपाती होती है|    F = ma  (जहाँ F=आरोपित बल , m = द्रव्यमान, a=त्वरण )|

  1. न्यूटन का तृतीय गति नियमः

    प्रयेक क्रिया के बराबर परन्तु विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है|

उदहारणः

  1. बंदूक से गोली चलाने पर पीछे को धक्का देती है|

2. रॉकेट उड़ाना।

3. नौका से नीचे कूदने पर नौका पीछे की ओर हट जाती है।