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कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति ( WORK, ENERGY AND POWER )

कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति ( WORK, ENERGY AND POWER )

कार्य (Work)

किसी वस्तु पर बल लगाकर उस वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करना कार्य (Work) कहलाता है। यह किया गया कार्य बल तथा बल की दिशा में हुए विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। कार्य का मात्रक जूल है। कार्य का S. I. मात्रक न्यूटन मीटर है। कार्य एक अदिश राशि है। कार्य को W से प्रदर्शित किया जाता है।

कार्य = बल ×  विस्थापन

ऊर्जा (Energy)

किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

ऊर्जा दो प्रकार की होती है- स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा।

स्थितिज ऊर्जा ( Potential Energy)

किसी वस्तु में उसकी स्थिति या आकृति में परिवर्तन के कारण निहित ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। जैसे- टरबाइन पर ऊंचाई से जल छोड़ने पर टरबाइन में स्थितिज ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है।

स्थितिज ऊर्जा वस्तु के द्रव्यमान, त्वरण तथा ऊंचाई का गुणनफल होती है।

अर्थात  PE = m×g×h

( जहां PE = स्थितिज ऊर्जा,  m = वस्तु का द्रव्यमान, g = त्वरण,  h = वस्तु की ऊंचाई)।

गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)

किसी वस्तु में गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) कहलाती है। किसी गतिमान वस्तु की गतिज ऊर्जा उस वस्तु की विराम अवस्था में आने तक किये गये कार्य के रूप में व्यक्त की जाती है। गतिज ऊर्जा को K से प्रदर्शित करते हैं । जैसे- बन्दूक से गोली का निकलना, धनुष से तीर का निकलना आदि।

K = ½ mv2 ( K = गतिज ऊर्जा , m = वस्तु का द्रव्यमान , v = वस्तु की गति )।

द्रव्यमान का वस्तु की गति पर प्रभावः

द्रव्यमान बढ़ने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है तथा द्रव्यमान घटने पर गतिज ऊर्जा घटती है। किसी वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाने पर गतिज ऊर्जा दो गुनी हो जाती है तथा द्रव्यमान आधा कर दिए जाने पर गतिज ऊर्जा घटकर आधी रह जाती है।

ऊर्जा के रूपः

ऊर्जा के विभिन्न रूप – ऊष्मीय ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा तथा सौर ऊर्जा हैं।

ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy)

कोई वस्तु ठण्डी होते समय जो कार्य करती है उसे ऊष्मीय ऊर्जा कहते हैं।

जैसे- किसी भाप इंजन में भाप का फैलना तथा ठण्डी होना, पिस्टन को गति में लाना आदि।

रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy)

किसी स्थिर रासायनिक यौगिक की ऊर्जा उसके अलग-अलग हिस्सों की तुलना में कम होती है। यह अन्तर यौगिक में इलेक्ट्रानों तथा नाभिकों की विशिष्ट व्यवस्था तथा गति के कारण होता है इसी इसी ऊर्जा को ही रासायनिक ऊर्जा कहते हैं।

जैसे- जल अपघटन, कोयले का दहन, ऊष्माक्षेपी या ऊष्माशोषी आदि।

विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy)

विद्युत आवेश तथा धारा एक दूसरे को आकर्षित या प्रतिकर्षित करते हैं अर्थात ये दोनों एक दूसरे पर बल लगाते हैं जिससे उत्पन्न ऊर्जा विद्युत ऊर्जा या विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा कहलाती है।

नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)

किसी नाभिक के न्यूट्रॉन तथा प्रोट्रान 10m कोटि की दूरियों पर एक दूसरे को आकर्षित करते हैं तथा नाभिक बनाने के लिए बाध्य होते हैं जिससे उत्पन्न ऊर्जा नाभिकीय ऊर्जा कहलाती है।

सौर ऊर्जा (Solar Energy)

सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा सौर ऊर्जा कहलाती है।

पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे विशाल स्रोत सूर्य है। सूर्य के केन्द्र में चार हाइड्रोजन नाभिक संलयित होकर हीलियम नाभिक बनाते हैं जिससे अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। सौर सेल के माध्यम से सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। सौर सेल बनाने के लिए सिलिकॉन, गैलियम जैसे अर्ध्दचालक प्रयोग में लाये जाते हैं।

सूर्य का निर्माण लगभग 70% हाइड्रोजन 70% हीलियम तथा 2% अन्य भारी तत्वों से हुआ है।

सूर्य के केन्द्र का तापमान 1.5 × 107 केल्विन (K) तथा दाब 2 × 1016 न्यूटन प्रति वर्ग मीटर है।

ऊर्जा संरक्षण का क्या नियम (Law of Energy Conservation)

ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। ऊर्जा मात्र एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित की जा सकती है । किसी बन्द निकाय में कुल ऊर्जा स्थाई होती है । इसी को ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते है।

शक्ति (Power)  

किसी वस्तु की कार्य करने की दर शक्ति कहलाती है। शक्ति का मात्रक वाट, अश्वशक्ति तथा किलोवाट है । एक अश्व शक्ति में 746 वाट तथा 1 किलो वाट में 1000 वाट होते हैं।

P = w/t ( जहां P = शक्ति, w = कार्य, t = समय ) ।

ऊर्जा रूपान्तरित करने वाले विभिन्न उपकरणः

उपकरण ऊर्जा का रूपान्तरण
विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में रूपान्तरित करता है ।
डायनेमो यान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित करता है ।
लाउडस्पीकर विद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में रूपान्तरित करता है ।
माइक्रोफोन ध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है ।
सौर सेल प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है ।
प्रकाश विद्युत सेल प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है ।
विद्युत सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरित करता है ।
कोयले का जलना रासायनिक ऊर्जा का ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरण ।
मोमबत्ती का जलना रासायनिक ऊर्जा का प्रकाश तथा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरण ।
सितार यान्त्रिक ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में रूपान्तरण ।
ट्यूबलाइट विद्युत ऊर्जा का प्रकाश तथा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरण ।
हीटर का जलना विद्युत ऊर्जा का प्रकाश तथा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरण ।
विद्युत बल्ब विद्युत ऊर्जा का प्रकाश तथा ऊष्मीय ऊर्जा में रूपान्तरण ।

 

. कार्य (Work) क्या है?

किसी वस्तु पर बल लगाकर उस वस्तु को बल की दिशा में विस्थापित करना कार्य (Work) कहलाता है।

कार्य = बल ×  विस्थापन

. ऊर्जा (Energy) क्या है?

किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं।

ऊर्जा दो प्रकार की होती है- स्थितिज ऊर्जा तथा गतिज ऊर्जा।

. स्थितिज ऊर्जा ( Potential Energy) क्या है?

किसी वस्तु में उसकी स्थिति या आकृति में परिवर्तन के कारण निहित ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा कहलाती है। स्थितिज ऊर्जा वस्तु के द्रव्यमान, त्वरण तथा ऊंचाई का गुणनफल होती है।

अर्थात  PE = m×g×h

( जहां PE = स्थितिज ऊर्जा,  m = वस्तु का द्रव्यमान, g = त्वरण,  h = वस्तु की ऊंचाई )।

. गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) क्या है?

किसी वस्तु में गति के कारण उत्पन्न ऊर्जा गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) कहलाती है।

K = ½ mv2 ( K = गतिज ऊर्जा , m = वस्तु का द्रव्यमान , v = वस्तु की गति )।

. द्रव्यमान का वस्तु की गति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

द्रव्यमान बढ़ने पर गतिज ऊर्जा बढ़ती है तथा द्रव्यमान घटने पर गतिज ऊर्जा घटती है।

किसी वस्तु का द्रव्यमान दो गुना कर दिया जाने पर गतिज ऊर्जा दो गुनी हो जाती है तथा द्रव्यमान आधा कर दिए जाने पर गतिज ऊर्जा घटकर आधी रह जाती है।

. ऊर्जा के कौन-कौन से रूप हैं?

ऊष्मीय ऊर्जा, रासायनिक ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, नाभिकीय ऊर्जा तथा सौर ऊर्जा।

. ऊर्जा संरक्षण का क्या नियम (Law of Energy Conservation) है?

ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। ऊर्जा मात्र एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित की जा सकती है । किसी बन्द निकाय में कुल ऊर्जा स्थाई होती है । इसी को ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते है।

. शक्ति (Power) क्या है?

किसी वस्तु की कार्य करने की दर शक्ति कहलाती है। शक्ति का मात्रक वाट, अश्वशक्ति तथा किलोवाट है।

P = w/t ( जहां P = शक्ति, w = कार्य, t = समय )।

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