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अपराध विवेचना/अन्वेषण (Crime Investigation)

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अपराध विवेचना/अन्वेषण (Crime Investigation)

अन्वेषण की परिभाषा

दण्ड प्रक्रिया संहिता 73 की धारा- 2(ज) के अनुसारः अन्वेषण को अन्तर्गत वे समस्त कार्यवाहियां आती हैं जो कि-

  1. किसी पुलिस अधिकारी द्वारा की जाती हैं; अथवा
  2. मजिस्ट्रेट से भिन्न किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है जिसे मजिस्ट्रेट द्वारा इस प्रयोजनल हेतु प्राधिकृत किया गया हो;
  3. दण्ड प्रक्रिया संहिता के अधीन साक्ष्य एकत्र करने के लिए की जाती है।

अन्वेषण का क्या उद्देश्य है ?

साक्ष्य एकत्रित करते हुए मामले की तह में जाकर निरापद सत्य का पता लगा कर न्यायालय को अवगत कराना है ।

अन्वेषण के प्रक्रमः

एच0एन0 रिशवुद वनाम स्टेट आफ दिल्ली A.I.R. 1955 S.C. 196 के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार अन्वेषण के निम्नांकित प्रक्रम हैं-

  1. घटना की सूचना मिलने पर तत्काल घटनास्थल पर जाकर घटनास्थल का निरी7ण करते हुए सुसंगत कार्यवाही करना।
  2. मामले के तथ्य और परिस्थितियों का निर्धारण करना।
  3. अपराध घटित होना पाये जाने पर अभियुक्त की खोज कर उसकी गिरफ्तारी करना।
  4. साक्ष्य एकत्रित करना।
  5. धारा-173 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत सम्बन्धित न्यायालय में पुलिस रिपोर्ट दाखिल करना।

क्या मजिस्ट्रेट अन्वेषण में हस्तक्षेप कर सकता है ?

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा- 190 के अनुसारः मजिस्ट्रेट द्वारा अन्वेषण में कोई हस्तक्षेप नही किया जा सकता है परन्तु अन्तिम रिपोर्ट स्वीकार करने या न करने का अर्थ मजिस्ट्रेट द्वारा अन्वेषण में हस्तक्षेप करना नही है।

अन्वेषण की प्रकृति कैसी होती है ?

अन्वेषण की प्रकृति न्यायिकेत्तर होती है।

अन्वेषण की रीति एवं पध्दति किस पर निर्भर करती है?

यूनियन बैंक आफ इण्डिया बनाम प्रकाश पी0 हिन्दूजा A.I.R. 2003 S.C.में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के अनुसारः अन्वेषण का कार्य पूर्ण रूप से पुलिस अधिकारी का है। अन्वेषण कैसे किया जाना है यह पुलिस अधिकारी को सुनिश्चित करना है अर्थात् अन्वेषण की रीति तथा पध्दति पूर्णरूपेण पूलिस अधिकारी पर ही निर्भर करती है।

अन्वेषण का प्रारम्भ तथा समाप्त होनाः

जब पुलिस अधिकारी किसी मामले में साक्ष्य एकत्रित करने की कार्यवाही करता है तो वहीं से अन्वेषण प्रारम्भ हो जाता है।

एम0 बट बनाम स्टेट 1973 क्रि0 ला0 ज0 886 के अनुसारः जहां प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त करने तथा मामले को पंजीकृत करने पर पुलिस अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण करता है, अभियुक्त के लिए पूंछतांछ करता है तथा साक्षियो के कथन अभिलिखित करता है तब अन्वेषण प्रारम्भ होता है।

मध्य प्रदेश बनाम मुबारक अली A.I.R 1959 S.C.707:1959 क्रि0 ला0 ज0 920; एम0 भट्ट बनाम राज्य 1973 क्रि0 ला0 ज0 886 : 1973 इलाहाबाद क्रि0 रू0 46 : 19073 इलाहाबाद डब्लू0 आर0 1 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार : किसी मामले की प्रथम सूचना  पर सामान्यतया अन्वेषण वहां से प्रारम्भ होता है जहां पुलिस अधिकारी द्वारा घटनास्थल पर जाकर कार्यवाही की जाती है और तथ्यों के अभिनिश्चय हो जाने पर अन्वेषण समाप्त हो जाता है।

सिराजुद्दीन बनाम राज्य  A.I.R 1959 1968 मद्रास 117 : 1968 मद्रास  L.W.(Cr.) 223 : 1968 क्रि0 ला0 ज0 493 : 1968 मद्रास L.J. .(Cr.) 313 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार : जब पुलिस अधिकारी यह राय बनाता है कि अपराध के अन्वेषण के लिए आधार है दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अधीन अन्वेषण प्ररम्भ हो जाता है।

महा सिंह बनाम दिल्ली राज्य 1976 क्रि0 ला0 ज0 346 : A.I.R 1976 S.C. 449 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार : जब भ्रष्टाचार निरोधक निरीक्षक ने अभिलिखित किया तथा रिश्वत लेने के दौरान अभियुक्त की खोज करने के लिए छापा का इन्तजाम किया तब अन्वेषण प्रारम्भ हो गया।

बलदेव सिंह बनाम् पंजाब राज्य 1975 क्रि0 ला0 ज0 1662 : 1975 पंजाब ला0 ज0 (क्रि0)193 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार : दण्ड प्रकिया संहिता 1973 की धारा- 173 के अधीन पुलिस अधिकारी द्वारा पुलिस रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिए जाने पर अन्वेषण समाप्त हो जाता है।

एक निश्चित व्यक्ति के विरूध्द अन्वेषण की आवश्यकता नहीः

अल्वर्ट बनाम केरल राज्य A.I.R 1966 केरल 11 : 1965 केरल एल0टी0 865 : 1965 केरल एल0 ज0 877 : 1966 क्रि0 ला0 ज0 26 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार :  किसी निश्चित व्यक्ति के विरूध्द अन्वेषण की आवश्यकता नही है।

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा-173 के अधीन पुलिस रिपोर्ट नामित व्यक्ति के विरूध्द हो सकेगीः

अल्वर्ट बनाम राज्य  A.I.R 1966 केरल 11 : 1966 केरल एल0टी0 865 : 1965 केरल एल0 ज0 877 : 1965 क्रि0 ला0 ज0 26 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसार : अन्वेषण के बाद पुलिस अधिकारी द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा- 173 के अधीन पुलिस रिपोर्ट नामित व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति के विरूध्द दाखिल की जा सकेगी।

दण्ड प्रक्रिया संहिता में अन्वेषण से समबन्धित प्राविधानः

इस संहिता में पुलिस अधिकारियों द्वारा अन्वेषण से सम्बन्धित प्राविधान धारा- 155, 156, 157 तथा 174 में वर्णित हैं। मजिस्ट्रेट के आदेश के अधीन अधिकारियों द्वारा अन्वेषण से सम्बन्धित प्राविधान धारा- 155(2), 155(3), 159 तथा 202 में वर्णित हैं।

अन्वेषण / विवेचना की प्रक्रियाः

दण्ड प्रकिया संहिता 1973 के अनुसार विवेचना की प्रक्रिया निम्नलिखित है-

  1. वादी मुकमा का कथन अंकित किया जाय।
  2. वादी के साथ यदि कोई गवाह आया हो तो उसका भी कथन अंकित किया जाय।
  3. गम्भीर रूप से घायल व्यक्ति का कथन अंकित किया जाना तथा उसे तत्काल सरकारी अस्पताल ले जाकर इलाज / परीक्षण कराया जाय।
  4. यदि गम्भीर रूप से घायल व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है तथा मूर्छित है या बोलनें मे असमर्थ है तो होश में आने पर उसका मृत्युकालिक कथन अंकित किए जाने हेतु रिपोर्ट देना।
  5. घटनास्थल का निरीक्षण करके नक्शा नजरी बनाना तथा भौतिक साक्ष्य संकलित करना।
  6. मृतक व्यक्ति का नियमानुसार पंचायतनामा भरकर शव का पोस्टमार्टम कराना।
  7. प्रथम सूचना रिपोर्ट के गवाहों का कथन अंकित करना।
  8. घटनास्थल के आस-पास रहने वाले स्वतन्त्र साक्षियों के कथन अंकित करना।
  9. अपराध घटित होना पाये जाने पर अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जाय।
  10. गिरफ्तारी न हो पाने की दशा में अभियुक्तो के विरूध्द धारा- 82 / 83 दण्ड प्रक्रिया संहिता की कार्यवाही की जाय।
  11. यदि घटना के अभियुक्त अज्ञात हों तो उनका पता लगाकर अपराध का अनावरण किया जाय।
  12. गिरफ्तार अभियुक्त से गहराई से पूंतांछ करते हुए कथन अंकित किया जाय।
  13. गिरफ्तार अभियुक्त का चिकित्सीय परीक्षण कराया जाय।
  14. यदि गिरफ्तार व्यक्ति जुर्म इकबाल करते हुए अपराध से सम्बन्धित वस्तु कहीं छिपाया जाना बताता है तो उसकी निशानदेही पर बरामदगी करते हुए नियमानुसार फर्द मुरत्तब कर सील व सर्व मुहर कर कब्जे पुलिस में जी जाय तथा थाने पर वापस लौटने पर थाना मालखाना में दाखिल की जाय।
  15. यदि किसी अभियुक्त की कार्यवाही शिनाख्त करानी है तो गिरफ्तरी के बाद तत्काल उसे बापर्दा कर दिया जाय तथा नियमानुसार कार्यवाही शिनाख्त करायी जाय।
  16. यदि वस्तु की कार्यवाही शिनाख्त करानी है तो नियमानुसार कार्यवाही शिनाख्त करायी जाय।
  17. सम्बन्धित चिकित्सक का कथन अंकित किया जाय।
  18. घटनास्थल से या अभियुक्त से प्राप्त भौतिक साक्ष्यो को विधि वि प्रयोगशाला भेज कर परीक्षण कराया जाय।
  19. मजरूब को आयी चोटों के सम्बन्ध में संशय होने पर मेडिकोलीगल एक्सपर्ट का मत प्राप्त किया जाय।
  20. विवेचना / अन्वेषण से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार आरोप पत्र / अन्तिम रिपोर्ट प्रेषित करते हुए विवेचना का समुचित निस्तारण किया जाय।

विवेचना / अन्वेषण के सिध्दान्तः

  1. विवेचना / अन्वेषण के प्रारम्भ में ही विवेचना की रूपरेखा तैयार की जाय।
  2. विवेचना / अन्वेषण में शीघ्र ही घटनास्थल का निरीक्षण किया जाय तथा किसी भी स्तर पर विलम्ब न किया जाय।
  3. विवेचना गहराई एवं निष्पक्षता से की जाय।
  4. अभियुक्त से अपराध के प्रत्येक पहलू पर पूंछतांछ की जाय।
  5. उन मामलों में जिनमें विवेचक स्वयं निर्णय नही ले सकता विधि विज्ञान या चिकित्सा विशेषज्ञ का अभिमत अवश्य लिया जाय।
  6. अन्वेषण की प्रत्येक कार्यवाही केश डायरी में अंकित की जाय।
  7. विवेचना के परिणाम / पुलिस रिपोर्ट से न्यायालय को समय से अवगत कराया जाय।

 

 

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