वायदा माफ गवाह (Forward witness)

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Forward witness

वायदा माफ गवाह (Forward witness)

वायदा माफ गवाह क्या  है?

(What is forward witness?)

जब किसी गम्भीर अपराध में संलिप्त कई अपराधियों में से किसी एक अपराधी को उस अपराध में साक्ष्य प्राप्त करने की दृष्टि से गवाह बनाया जाता है तो उसे वायदा माफ गवाह कहते हैं। इसे सरकारी गवाह भी कहा जाता है।

साक्ष्य अधिनियम की धारा 133 के अनुसारः  वायदा माफ गवाह  अन्य अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में सक्षम गवाह होता है जिसकी गवाही के आधार पर अन्य सभी अभियुक्तों / अपराधियों को दण्डित किया जा सकता है।

वायदा माफ गवाह कब बनाया जाता है?

(When is the promised pardon made?)

धारा 306 दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसारः किसी गम्भीर अपराध के अभियोग के अभियुक्त को विवेचना के दौरान या विचारण के दौरान वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है। विवेचना के दौरान किसी गम्भीर अपराध में यदि कोई अभियुक्त वायदा माफ गवाह बनने की इच्छा व्यक्त करता है तो  विवेचक द्वारा धारा 306 दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार उसे वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है । विचारण के दौरान न्यायालय के समक्ष यदि कोई अभियुक्त वायदा माफ गवाह बनने की इच्छा व्यक्त करता है तो न्यायालय द्वारा उसे वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है।

वायदा माफ गवाह कौन बन सकता है? (Who can become a promised pardon?)

  1. सत्र न्यायालय द्वारा विचाराधीन किसी अपराध का अपराधी को वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है।
  2. विशेष न्यायालय द्वारा विचाराधीन किसी अपराध का अपराधी को वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है।
  3. 07 वर्ष या उससे अधिक के दण्ड से दण्डनीय इसी अपराध का अपराधी को वायदा माफ गवाह बनाया जा सकता है।

मात्र सह अपराधी के साक्ष्य के आधार पर दोषसिध्दि असुरक्षित (Conviction unsafe based solely on the evidence of co-offenders)

शेशन्ना भूमन्ना यादव बनाम् महाराष्ट्र राज्य 1975 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्रारा पारित निर्णय के अनुसार इकबाली साक्षी के मूल्यांकन के बावत विधि, साक्ष्य अधिनियम की धाराओं 133 तथा 114(ख) के दृष्टान्त के प्रभाव पर आधारित है यानी यह कि सह अपराधी अभिसाक्ष्य देने के लिए सक्षम है परन्तु चेतावनी के नियम के रूप में मात्र उसके अभिसाक्ष्य पर ही दोषसिध्दि करना असुरक्षित है। अतः सम्पुष्ट साक्ष्य पर दोषसिध्दि करने के खतरे की चेतावनी उस समय दी जाती है जबकि साक्ष्य सहअपराधी का होता है। सह अपराधी का प्रारम्भिक अर्थ आरोपित अपराध का कोई पक्षकार तथा ऐसा कोई व्यक्ति है जो कि अपराध के करनें में सहायता करता है और दुष्प्रेरण करता है।

वायदा माफ गवाह कैसे बनता है?  (How to become a futures forgive?)

  1. ऐसा अपराधी जो अपराध में अन्य अपराधियों के साथ सम्मिलित रहा हो तथा गिरफ्तार किया जाए या न्यायालय में आत्मसमर्पण कर जेल जाए और विवेचक को अपने बयान में अपराध को स्वीकार करते हुए घटना में अपने साथ सम्मिलित रहे अन्य अपराधियों के विरुद्ध गवाह बनने की इच्छा व्यक्त करें।
  2. ऐसी  अभियुक्त को न्यायालय में उपस्थित कराया जाएगा जहां पर वह वायदा माफ गवाह बनने का प्रार्थना पत्र देगा।
  3. यदि न्यायालय अभियुक्त के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करके उसको वायदा माफ गवाह बनने के लिए सहमत होगा तो उसका बयान मजिस्ट्रेट द्वारा लिखा जाएगा।
  4. यदि अभियुक्त की जमानत नहीं हुई है तथा वह जेल में है तो विचारण की समाप्ति तक उसे जेल में रखा जाएगा ताकि वह पूर्णतया सुरक्षित रहे तथा किसी बाह्य प्रभाव में न आए।
  5. विचारण के समय न्यायालय द्वारा पुनः उसका बयान लिखा जाएगा।
  6. यदि वायदा माफ गवाह बनने के बाद वह विचारण के समय मुकर जाता है तो न्यायालय उस अपराध में उसके विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है जिसमें उसे वायदा माफ गवाह बनाया गया है तथा झूठी गवाही देने के अपराध में भी उसके विरुद्ध मुकदमा चला सकता है।
  7. किसी अपराध के विचारण के दौरान भी न्यायालय किसी अपराधी को उसके द्वारा प्रार्थना पत्र दिए जाने पर वायदा माफ गवाह बना सकता है।
  8. वायदा माफ गवाह वाले अपराधों का विचारण सत्र न्यायालय, विशेष न्यायालय तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में ही होता है।