किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति की कार्यवाही शिनाख्त (Identification of a person accused of a crime)

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Identification of a person accused of a crime

किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति की कार्यवाही शिनाख्त (Identification of a person accused of a crime)

 किसी आरोपी व्यक्ति की कार्यवाही शिनाख्त कब कराई जाती है?

(When is the action of an accused person identified)

जब थाने पर कोई ऐसा अभियोग पंजीकृत होता है जिसमें अभियुक्त नामजद नहीं होते तथा प्रथम सूचना रिपोर्ट में यह अंकित कराया जाता है कि वादी मुकदमा व गवाहान अभियुक्त को पहले से ही जानते हैं तथा सामने आने पर पहचान सकते हैं। ऐसे अपराध की विवेचना में जब अभियुक्त गिरफ्तार किये जाते हैं तो उनकी कार्यवाही शिनाख्त कार्यपालक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में जेल में वादी मुकदमा व  गवाहन से कराई जाती है। यदि गवाहान उनकी सही पहचान कर लेते हैं तो उनके विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जाता है और यदि पहचान नहीं होती है तो पुलिस द्वारा प्रेषित धारा- 169 सी0आर0पी0सी0 की रिपोर्ट पर न्यायालय उनको रिहा कर देता है।

आरोपी व्यक्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराने का क्या उद्देश्य है?

(What is the purpose of identifying the accused person,s proceeding?)

 इसका मुख्य उद्देश्य अपराध से सम्बन्धित सही अभियुक्त का पता लगाना है।

अभियुक्तों / अभियुक्त की कार्यवाही शिनाख्त के लिए पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाहीः

  1. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त को गिरफ्तार करते समय तुरन्त मौके पर ही उनके चेहरे को किसी कपड़े से ढक देना चाहिए जिससे कोई व्यक्ति उनका चेहरा न देखने पाये।
  2. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त को थाने पर वापर्दा लाना चाहिए तथा वापर्दा ही हवालात में दाखिल करना चाहिए जिसका उल्लेख वापसी में थाने की रोजनामचा में अंकित किया जाना चाहिए।
  3. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त को थाने की हवालात में बन्द करने के बाद हवालात के दरवाजे पर कम्बल का पर्दा डाल दिया जाए ताकि उनका चेहरा कोई न देख सके।
  4. थाने पर सन्तरी ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मचारी को यह निर्देश दिया जाए कि ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त का चेहरा किसी को न देखने दे।
  5. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त को सचेत किया जाए कि वह अपने चेहरे को छिपाए रखे ताकि उन्हें कोई देख न सके।
  6. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त को न्यायालय में वापर्दा पेश किया जाए तथा जेल जाने का वारण्ट भी वापर्दा रखे जाने का बनवाया जाए।
  7. ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त के जेल में दाखिल हो जाने के बाद उनकी कार्यवाही शिनाख्त कराने की रिपोर्ट ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट को दी जाए जो जनपद में इस कार्यवाही हेतु नियुक्त होते हैं।
  8. पुलिस अधिकारी / विवेचक की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट कार्यवाही शिनाख्त की तिथि नियत करता है तथा उस नियत तिथि पर थाने के पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा कार्यवाही शिनाख्त करने वाले गवाहों को जेल पर लाया जाता है तथा एक-एक गवाह को जेल के अन्दर बुलाकर अभियुक्तों / अभियुक्त की पहचान मजिस्ट्रेट की समक्ष सम्पन्न कराई जाती है। विवेचक द्वारा गवाहों को कार्यवाही शिनाख्त की प्रक्रिया की जानकारी दी जाती है ताकि गवाह द्वारा कार्यवाही शिनाख्त करने में कोई त्रुटि न की जाए।
  9. कार्यवाही शिनाख्त में कार्यपालक मजिस्ट्रेट, अभियुक्त के वकील, पहचान करने वाले गवाह तथा एक पी0ओ0 या ए0पी0ओ0 उपस्थित रहते हैं। वहां पर कोई पुलिस कर्मी उपस्थित नहीं रहता है।
  10. प्रत्येक अभियुक्त को उसके शारीरिक गठन से मिलते-जुलते 10 व्यक्तियों में मिलाकर एक लाइन में खड़ा कर दिया जाता है तथा उनकी गर्दन तक कम्बल लगा दिया जाता है। अभियुक्त के चेहरे की मुख्य मुख्य पहचान के चिन्हों पर कागज की चिप्पी चिपका दी जाती है। यही चिप्पी अन्य 10 व्यक्तियों के चेहरे पर भी लगाई जाती है।
  11. प्रत्येक गवाह को एक अभियुक्त की परेड के समक्ष चलकर तीन चक्कर लगाकर पहचान करने का अवसर प्रदान किया जाता है।
  12. कार्यवाही शिनाख्त के परिणाम की रिपोर्ट प्राप्त होने पर यदि यह ज्ञात होता है कि गवाह ने अभियुक्तों / अभियुक्त की सही पहचान की है तो पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया जाता है। यदि यह ज्ञात होता है कि गवाह ने अभियुक्तों / अभियुक्त की सही पहचान नहीं की है तो पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा ऐसे अभियुक्तों / अभियुक्त की रिहाई हेतु धारा- 169 सी0आर0पी0सी0 की रिपोर्ट न्यायालय प्रेषित की जाती है जिस पर न्यायालय ऐसे अभियुक्तों को रिहा कर देता है।