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पुलिस द्वारा बरामद की गई सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराया जाना (Identification of property recovered by police)

पुलिस द्वारा बरामद की गई सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराया जाना (Identification of property recovered by police)

पुलिस द्वारा बरामद की गई किस प्रकार की सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराई जाती है? (What type of property recovered by police is executed?)

जब पुलिस थाने पर चोरी, लूट या डकैती का कोई ऐसा अभियोग पंजीकृत होता है जिनमें चुराई या लूटी गई सम्पत्ति का स्वामित्व उसके बरामद होने पर बिना कार्यवाही शिनाख्त के सिद्ध नहीं हो सकता तो ऐसी सम्पत्ति के स्वामित्व का पता लगाने के लिए उस सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराई जाती है। इस प्रकार की सम्पत्ति में जेवर, बर्तन, कपड़े आदि वस्तुएं आती हैं जिन पर पहचान का कोई चिन्ह नहीं होता है।

सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराए जाने का क्या उद्देश्य है? (What is the purpose of getting the property executed?)

सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराए जाने का मुख्य उद्देश्य वास्तविक अभियुक्त तथा बरामद सम्पत्ति के वास्तविक स्वामी का पता लगाना ह ।

कार्यवाही शिनाख्त से सम्बन्धित सम्पत्ति बरामद होने पर पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा क्या-क्या कार्यवाही की जाती है? (What action is taken by the police officer in case the property related to the identification is recovered?)

कार्यवाही शिनाख्त से सम्बन्धित सम्पत्ति बरामद होने पर पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा निम्नांकित कार्यवाही की जाती हैः

  1. ऐसी सम्पत्ति बरामद होने पर बरामद सम्पत्ति का पूरा हुलिया फर्द बरामदगी में अंकित कर उसे कपड़े में सील व सर्व मुहर कर देना चाहिए ताकि किसी गवाह को सम्पत्ति देखने का अवसर न मिले तथा सम्पत्ति सुरक्षित रहे।
  2. थाने पर वापसी में ऐसी बरामद सम्पत्ति को मालखाने में दाखिल किया जाए तथा बरामदगी सम्बन्धी विस्तृत विवरण रोजनामचा में अंकित किया जाए।
  3. ऐसी सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त सम्पन्न कराने के लिए पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजी जाए जो इस कार्य के लिए जनपद में नियुक्त हो।
  4. पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा कार्यपालक मजिस्ट्रेट को प्रेषित रिपोर्ट में संम्पत्ति का पूरा विवरण तथा उन गवाहों के नाम व पते अंकित किए जाएंगे जिनसे सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त कराया जाना है । विवेचक द्वारा विवेचना के दौरान गवाहों के बयान में भी यह बात पहले से अंकित की जाए की सम्पत्ति बरामद होने पर कौन-कौन से गवाह सम्पत्ति की पहचान करेंगे।
  5. पुलिस अधिकारी / विवेचक की रिपोर्ट प्राप्त होने पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त हेतु तिथि नियत करता है।
  6. सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त हेतु कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा नियत की गई तिथि पर पुलिस अधिकारी / विवेचक द्वारा सम्बन्धित सम्पत्ति तथा कार्यवाही शिनाख्त के गवाहान को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के न्यायालय ले लाया जाता है।
  7. न्यायालय में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रत्येक बरामद सम्पत्ति को उसी से मिलती-जुलती पांच अन्य सम्पत्तियों में मिलाकर मेज पर रख दिया जाता है तथा एक-एक गवाह को पहचान करने का अवसर दिया जाता है।
  8. कार्यवाही शिनाख्त कराने में बरामद सम्पत्ति में मिला कर रखी जाने वाली परिसम्पत्तियों को सरकारी ठेकेदार लाता है।
  9. कार्यवाही शिनाख्त के समय मौके पर कोई पुलिसकर्मी नहीं रहता है।
  10. सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त के समय मौके पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट, ए0 पी0 ओ0/पी0 ओ0, अभियुक्त का वकील और शिनाख्त करने वाले गवाह मौजूद रहते हैं। अन्य कोई नही मौजूद रहता है।
  11. पुलिस अधिकारी / विवेचक कार्यवाही शिनाख्त के गवाहों को सम्पत्ति की कार्यवाही शिनाख्त की प्रक्रिया की जानकारी दे सकता है जिससे गवाहों द्वारा सम्पत्ति शिनाख्त की प्रक्रिया सम्बन्धी कोई त्रुटि न की जाए तथा सही शिनाख्त हो सके।
  12. कार्यवाही शिनाख्त सम्पत्ति का लिखित परिणाम प्राप्त होने पर यदि ज्ञात होता है कि सम्पत्ति की सही पहचान कर ली गई है तो सम्बन्धित अभियुक्तों/अभियुक्त के विरुद्ध सम्बन्धित धाराओं में आरोप पत्र सम्बन्धित न्यायालय प्रेषित किया जाता है जिस पर सम्बन्धित न्यायालय द्वारा प्रसंज्ञान लिया जाता है । यदि यह ज्ञात होता है कि गवाह ने सम्पत्ति  की सही पहचान नहीं की है तो पुलिस अधिकारी/विवेचक द्वारा सम्बन्धित अभियुक्तों/अभियुक्त की रिहाई हेतु धारा- 169 सी0 आर0 पी0 सी0 की रिपोर्ट न्यायालय प्रेषित की जाती है जिस पर न्यायालय ऐसे अभियुक्तों को रिहा कर देता है।

 

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