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अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धी प्रमुख अपराध

अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धी प्रमुख अपराध 

भारतीय दण्ड संहिता तथा विभिन्न अधिनियम में कुछ ऐसे प्रमुख अपराध हैं जिनमें आरोप पत्र न्यायालय भेजने के पूर्व अभियोजन स्वीकृति लिए जाने का प्रावधान है। इन अपराधों में बगैर अभियोजन अनुमति प्राप्त किए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल ही नही किया जा सकता है। ऐसे प्रमुख अपराधों का संक्षिप्त विवरण निम्नवत हैः

  1. धारा 121 से 130 तथा 153(ए), 295(ए) एवं 505(1) भा0 दं0 सं0 के अपराध में आपराधिक षड्यन्त्र किए जाने पर धारा 120 (बी) भा0 दं0 सं0 के घटित अपराध में- धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  2. धारा 121 से 130 तथा 153(ए), 295(ए) एवं 505(1) भा0 दं0 सं0 के अपराध में उत्प्रेरण होने पर धारा 108 भा0 दं0 सं0 के घटित अपराध में-    धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  3. धारा 121 से 130 तथा 153(ए), 295(ए) एवं 505(1) भा0 दं0 सं0 के घटित अपराध में- धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  4. धारा 153 बी, 505 (2) व 505(3) भा0 दं0 सं0 के घटित अपराध में-   धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  5. धारा 153 बी, 505 (2) व 505(3) भा0 दं0 सं0 के अपराध में आपराधिक षड्यन्त्र का अपराध घटित होने पर-   धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  6. धारा 120(बी) भारतीय दण्ड संहिता के उन अपराधों में जो मृत्युदण्ड, आजीवन कारावास या 2 वर्ष या उससे अधिक के कठिन कारावास से दण्डनीय अपराध के अपराधिक षड्यन्त्र से भिन्न है- धारा 196 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार केन्द्र सरकार / राज्य सरकार / जिलाधिकारी से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की जाती है।
  7. न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक के विरुद्ध उस कार्य के लिए जिसे उसने अपने कर्तव्य के निर्वहन में किया है- धारा 197 दण्ड प्रक्रिया संहिता में वर्णित प्रावधान के अनुसार अभियोजन स्वीकृति केन्द्र सरकार / राज्य सरकार से प्राप्त की जाती है।
  8. धारा 3, 4, 5 व 6 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के घटित अपराध में-   धारा 7 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के अनुसार अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धित जिलाधिकारी से प्राप्त की जाती है।
  9. आतंकवाद निवारण अधिनियम के घटित अपराधो मेंधारा 50 आतंकवाद निवारण अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के अनुसार अभियोजन स्वीकृति राज्य सरकार से प्राप्त की जाती है।
  10. आयुध अधिनियम की धारा 3 / 25 के घटित अपराध में- धारा 39 आयुध अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के अनुसार अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धित जिलाधिकारी से ली जाती है।
  11. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के घटित अपराध मेंभ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा- 19 के अनुसार अभियोजन स्वीकृति केन्द्र सरकार / राज्य सरकार या पद से हटाने के लिए प्राधिकृत अधिकारी से ली जाती है।
  12. खाद्य अपमिश्रण अधिनियम 1954 के घटित अपराध में- खाद्य पदार्थ मिश्रण अधिनियम की धारा 20 के तहत अभियोजन स्वीकृति राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत चिकित्सा अधिकारी या स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी से ली जाती है।
  13. आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के घटित अपराध में- आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 11 के अनुसार अभियोजन स्वीकृति जिला मजिस्ट्रेट से ली जाती है।
  14. पासपोर्ट अधिनियम 1967 के घटित अपराध में अभियोजन स्वीकृति- पासपोर्ट अधिनियम की धारा 15 के अनुसार केन्द्र सरकार या केन्द्र सरकार द्वारा प्राधिकृत अधिकारी से ली जाती है।
  15. एन्टी हाईजैकिंग अधिनियम 1982 के घटित अपराध में अभियोजन स्वीकृति- एन्टी हाईजैकिंग अधिनियम 1982 की धारा 10 के अनुसार अभियोजन स्वीकृति केन्द्र सरकार से प्राप्त की जाती है।
  16. उत्तर प्रदेश दुग्ध अधिनियम 1976 के घटित अपराध में अभियोजन स्वीकृति- उत्तर प्रदेश दुग्ध अधिनियम की धारा 18 के अनुसार घटना के 6 माह के अन्दर अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धित जिलाधिकारी से ली जाती है।
  17. उत्तर प्रदेश गिरोहबन्द एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप नियन्त्रण अधिनियम 1986 के घटित अपराध में अभियोजन स्वीकृति-अभियोजन स्वीकृति सम्बन्धित जिला मजिस्ट्रेट से ली जाती है।

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