पुलिस अभिरक्षा तथा जमानत (Police Custody and Bail)

0
55
Police Custody and Bail

पुलिस अभिरक्षा तथा जमानत (Police Custody and Bail)

पुलिस अभिरक्षा क्या है?

(What is police custody?)

किसी पुलिस अधिकारी द्वारा किसी व्यक्ति को अपनी अभिरक्षा में लेना या बन्धन में रखना पुलिस अभिरक्षा कहलाता है। अभिरक्षा में रखा गया व्यक्ति बिना पुलिस अधिकारी की अनुमति कहीं नहीं जा सकता है।

पुलिस अभिरक्षा के  प्रकार (Types of police custody)

पुलिस अभिरक्षा निम्नांकित प्रकार से हो सकती है-

  1. बिना वारण्ट गिरफ्तारी।
  2. वारण्ट द्वारा गिरफ्तारी।
  3. पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड के द्वारा।
  4. किसी अपराध के सम्बन्ध में पूंछतांछ के लिए थाने पर लाए जाने के या बुलाए जाने के कारण।
  5. किसी दूसरे थाने के वे अभियुक्तगण जो न्यायालय में देरी से पहुंचने के कारण न्यायालय के समक्ष पेशी न हो पाने के कारण थाने में लाकर हवालात में बन्द कर दिए जाते हैं।
  6. जनता द्वारा किसी संज्ञेय अपराध में पकड़कर थाने लाए गए व्यक्ति की गिरफ्तारी के द्वारा पुलिस अभिरक्षा।

गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस अधिकारी कितने समय तक अपनी अभिरक्षा में रख सकता है? (How long can a police officer keep the arrested person in his custody?)

गिरफ्तार किये गए किसी भी व्यक्ति को कोई पुलिस अधिकारी 24 घण्टे से अधिक अपनी अभिरक्षा में नहीं रख सकता। गिरफतारी के 24 घण्टे के अन्दर सम्बंन्धित न्यायालय में पेश किया जाएगा, जिसमें गिरफ्तारी के स्थान से न्यायालय तक पहुंचने की दूरी तय करने में लगा समय सम्मिलित नहीं है। पुलिस अभिरक्षा का समय थाने की रोजनामचा आम में उस व्यक्ति की आमद तथा रवानगी के बीच का समय माना जाता है।

पुलिस अभिरक्षा कब अवैध मानी जाती है? (When is police custody considered illegle?)

  1. किसी ऐसे व्यक्ति को जो किसी अपराध मे लिप्त नहीं है को बुलाकर या लाकर बिना लिखा पढ़ी किए थाने पर रोका जाए तो इसे अवैध पुलिस अभिरक्षा माना जाता है।
  2. जब किसी अपराध में लिप्त व्यक्ति को लाकर या बुलाकर बिना लिखा पढ़ी किए थाने पर रोक रखा जाए तो इसे अवैध पुलिस अभिरक्षा माना जाता है।

पुलिस अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति के सम्बंन्ध में पुलिस द्वारा बरती जाने वाली सावधानियां एवं कर्तव्य (Precaution and duties to be taken by the police in relation to a person taken in police custody)

  1. यदि उसे बिना वारण्ट गिरफ्तार किया गया है तो उसे तत्काल गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा।
  2. ऐसे व्यक्ति की तलाशी ली जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए उसके पास कोई आपत्तिजनक वस्तु जैसे- ज्वलनशील पदार्थ, माचिस, चाकू, लाइटर, नशीला पदार्थ आदि न हो।
  3. ऐसे व्यक्ति की तलाशीकी तलाशी से प्राप्त कोई वस्तु यदि पुलिस कब्जे में ली जाए तो उसकी रसीद उसे तत्काल दी जाए।
  4. अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति पर बल प्रयोग न किया जाए अर्थात् उसके साथ कोई दुर्व्यवहार न किया जाए।
  5. अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति की यदि कार्यवाही शिनाख्त होनी है तो उसे वापर्दा रखा जाए।
  6. पुलिस अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति को अपने वकील से मिलने दिया जाए।
  7. अभिरक्षा में लिया गया व्यक्ति यदि बीमार है तो उसके डाक्टरी परीक्षण एवं उपचार की व्यवस्था की जाए।
  8. गिरफ्तारी द्वारा अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति की गिरफ्तारी की सूचना उसके परिजनों को अवश्य दी जाए।
  9. पुलिस अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति के भोजन की व्यवस्था की जाए।
  10. पुलिस अभिरक्षा में लिए गए व्यक्ति को अपने परिजनों व स्वजनों से अवशय मिलने दिया जाए।

पुलिस द्वारा अभियुक्त को  जमानत दिये जाने के विभिन्न प्राविधान (Various provisions for grant of bail to accused by police)  

जमानतीय अपराध तथा जमानतीय वारण्ट में पुलिस द्वारा जमानत दिए जाने का प्राविधान (धारा- 436 दं0प्र0सं0)

  1. जब कोई व्यक्ति जमानतीय अपराध में पुलिस थाना भारसाधक अधिकारी द्वारा बिना वारण्ट गिरफ्तार किया जाता है तो उक्त व्यक्ति द्वारा जमानत दिये जाने पर उसे तत्काल जमानत पर छोड दिया जायेगा।
  2. जब कोई व्यक्ति जमानतीय वारण्ट के द्वारा गिरफ्तार किया जाता है तो उक्त गिरफ्तार  व्यक्ति द्वारा जमानत दिये जाने पर उसे तत्काल जमानत पर छोड दिया जायेगा।

अजमानतीय अपराध में पुलिस द्वारा जमानत दिए जाने का प्राविधान (धारा- 437 दं0प्र0सं0)

  1. जब किसी व्यक्ति को किसी अजमानतीय अपराध में पुलिस थाना भारसाधक अधिकारी द्वारा बिना वारण्ट गिरफ्तार किया जाता है तथा उक्त व्यक्ति- (a) मृत्युदण्ड या आजीवन कारावास के दण्ड से दण्डनीय अपराध का दोषी न हो  (b) पूर्व में मृत्युदण्ड आजीवन कारावास या 7 वर्ष या उससे अधिक के दण्ड के कारावास से दण्डनीय अपराध में सजायाफ्ता न हो (c ) किसी संज्ञेय अपराध या अजमानतीय अपराध में दो या दो से अधिक बार दण्डित न हुआ हो, तो पुलिस थाना भारसाधक अधिकारी द्वारा उसे जमानत पर छोड़ा जा सकता है।
  2. यदि कोई व्यक्ति अजमानतीय अपराध में गिरफ्तार किया जाता है तथा  विवेचना के दौरान पुलिस थाना भारसाधक अधिकारी को ऐसा लगता है या विश्वास करने का कारण है  कि अभियुक्त ने कोई अजमानतीय अपराध नही किया है परन्तु अग्रिम जांच करने के पर्याप्त आधार हैं तो उसे जमानत पर छोडा जा सकता है।
  3. यदि किसी अजमानतीय अपराध के किसी अभियुक्त को जमानत पर छोडा जाता है तो उसका कारण पुलिस थाने के रोजनामचा आम में अवश्य अंकित किया जायेगा।