अपीलीय न्यायालय की शक्तियां (POWERS OF APPELLATE COURTS)

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APPELLATE COURTS

अपीलीय न्यायालय की शक्तियों का वर्णन दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-385 में किया गया है जो कि निम्नवत हैः-

दोषमुक्ति के आदेश के विरूध्द अपील किये जाने पर अपीलीय न्यायालय की शक्तिः

दोषमुक्ति के आदेश के विरूध्द अपील किये जाने पर दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-385 के अनुसार अपीलीय न्यायालय को निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैः-

  1. अपराधी को दोषी पा सकेगा या विधि के अनुसार दण्डादेश दे सकता है।

अथवा

  1. अतिरिक्त जांच का आदेश दे सकता है।

अथवा

  1. सम्बन्धित न्यायालय को विचारण का आदेश दे सकता है।

दोषसिध्दि के आदेश के विरूध्द अपील किये जाने पर अपील न्यायालय की शक्तिः

दोषसिध्दि के आदेश के विरूध्द अपील किये जाने पर अपीलीय न्यायालय को निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैः-

  1. विचारण न्यायालय के निर्णय को उलट कर अपराधी को दोषमुक्त या अन्मोचित कर सकता है।

अथवा

  1. उसका पुनः विचारण किए जाने का आदेश दे सकता है।

अथवा

  1. दण्डादेश को बनाये रखते हुए निर्णय में परिवर्तन कर सकता है।

अथवा

  1. दण्ड की प्रकृति तथा उसके परिमाण में परिवर्तन कर सकता है।

दण्डादेश में वृध्दि किये जाने के विरूध्द अपील किये जाने पर अपील न्यायालय की शक्तियाःं

दण्डादेश में वृध्दि किये जाने के विरूध्द अपील किये जाने पर अपीलीय न्यायालय को निम्नांकित शक्तियां प्राप्त हैः-

  1. न्यायालय के निर्णय को उलट सकता है तथा अपराधी को दोषमुक्त या उन्मोचित कर सकता है या ऐसे अपराध का विचारण करने के लिए सक्षम न्यायालय को आदेश दे सकता है।

अथवा

  1. दण्डादेश को कायम रखते हुए निष्कर्ष में परिवर्तन कर सकता है।

अथवा

  1. निष्कर्ष में परिवर्तन करते हुए या बिना परिवर्तन किए दण्डादेश की प्रकृति या परिमाण में परिवर्तन कर सकता है जिससे उसमें कमी या वृध्दि हो जाए।

किसी अन्य आदेश से अपील किए जाने पर अपीलीय न्यायालय ऐसे आदेश में परिवर्तन कर सकता है या उसे उलट सकता है।

यदि अपराधी ने अपील किया है तो अपीलीय न्यायालय उससे अधिक दण्ड नही दे सकता है जो ऐसे अपराध के लिए अपीलकृत आदेश या दण्डादेश पारित करने का न्यायालय दे सकता था।

मुनियापात्र बनाम् स्टेट आफ तमिलनाडु ए0 आई0 आर0 1981 एस0 सी0 1220 के वाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः अधीनस्थ न्यायालयो क् समक्ष उपसंजात होने वाले अधिवक्ताओं को आचरण पर उच्च न्यायालय को कोई निर्णय पारित नही करना चाहिए।

राम शंकर सिंह बनाम् स्टेट आफ वेस्ट बंगाल ए0 आई0 आर0 1981  एस0 सी0 12230 के वाद में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः उच्च न्यायालय दोषसिध्द या दण्डादेश या दोषमुक्ति के आदेश के विरूध्द अपीलों में पुनः विचारण या साक्ष्य पर पुनः विचार करते हुए दोषसिध्दि या दण्डादेश के संघारण का आदेश देने के लिए सक्षम है।

चन्द्रशेखर बनाम् स्टेट 1971, 2 कटक एल0 टी0 833 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः

अपीलीय न्यायालय किसी अपील को निचले न्यायालय को सुनवाई करने तथा उसका निपटारा करने के लिए प्रतिप्रेषित कर सकता है।

डी0 एक्स0 एन0 देशाई बनाम स्टेट आफ गोवा ए0 आई0 आर0 1967 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः अपीलीय न्यायालय अपील की सुनवाई के दौरान विधि में हुए किसी परिवर्तन पर भी विचार कर सकता है।

सी0 पी0 फर्नाण्डिस बनाम् यूनियन टेरीटरी ए0 आई0 आर0 1977 एस0 सी0 135 के वाद में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः अपीलीय न्यायालय विचारण न्यायालय के निष्कर्षों में बिना किसी सारभूत आधार के मामूली तौर पर हस्तक्षेप नही करेगा।

अत्तर सिंह बनाम् स्टेट आफ मध्य प्रदेश ए0 आई0 आर0 1979 एस0 सी0 1188 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः जहां किसी मामले में साक्ष्य के बारे में दो युक्तियुक्त दृष्टिकोण सम्भाव्य हो तथा वियारण न्यायालय नें उनमें से एक को जो अभियुक्त के पक्ष में हो, को चुना हो वहां पर उच्च न्यायालय को इसमें मात्र इस, आधार पर हस्तक्षेप नही करना चाहिए कि यदि वह विचारण न्यायालय होता तो उनमें से दूसरे दृष्टिकोण को चुनकर अभियुक्त को दोषसिध्द कर देता।

स्टेट आफ उड़ीसा बनाम राम चन्द्र अग्रवाल ए0 आई0 आर0 1979 एस0 सी0 87 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः उच्च न्यायालय स्वयं अपने आदेश का पुनरावलोकन या परीक्षण नही कर सकता है।

अपीलीय न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लिया जानाः दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 391 में अपीलीय न्यायालय द्वारा अतिरिक्त साक्ष्य लिए जाने के सम्बन्ध में विशिष्ट प्राविधान किया गया है।

उक्त धारा उक्त सामान्य नियम का अपवाद प्रस्तुत करती है कि- किसी अपील का विनिश्चय विचारण न्याायालय द्वारा ली गयी साक्ष्य के आधार पर किया जाना चाहिए।

इसके अनुसार-(1) जब भी अपीलीय न्यायालय किसी अपील पर विचार करते समय अतिरिक्त साक्ष्य लिया जाना आवश्यक समझे तो वह उन कारणों को अभिलिखित करते हुए या तो स्वयं ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य ले सकता है या किसी मजिस्ट्रेट को ऐसा साक्ष्य लेने के लिए  निर्देशित कर सकता है।

(2)सम्बन्धित मजिस्ट्रेट द्वारा ऐसा साक्ष्य लेकर उसे प्रमाणित करके अपीलीय न्यायालय के पास भेजा जायेगा ।

(3)ऐसा अतिरिक्त साक्ष्य लेते समय सम्बन्धित अभियुक्त या उसके अधिवक्ता को उपस्थित रहने का अधिकार होगा।

रमाकान्त खादीगर बनाम स्टेट A.I.R. 1957 उड़ीसा 10 में माननीय न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय के अनुसारः अतिरिक्त साक्ष्य लेने की शक्ति पुनरीक्षण न्यायालय को भी प्राप्त है।

अतिरिक्त साक्ष्य लिए जाने का उद्देश्यः विचारण न्यायालय द्वारा किसी साक्ष्य का लापरवाही या अज्ञानतावश लिया जाना छूट/रह जाने पर न्याय के उद्देश्यों के लिए उसे अपीलीय न्यायालय द्वारा लिया जाना है।