परिवीक्षा (PROBATION)

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PROBATION

परिवीक्षा (PROBATION)

परिवीक्षा क्या है?

(What is Probation?)

परिवीक्षा शब्द अंग्रेजी भाषा के Probation शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। Probation शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Probare  शब्द से हुई है जिसका अभिप्राय परीक्षण करना है । परिवीक्षा का सूत्रपात 1941 ई0 में हुआ।

जब किसी अपराधी को उसके दण्ड का निलम्बन कर उसे कुछ शर्तों पर रिहा कर के समाज में रहने की अनुमति दी जाती है तो उसे परिवीक्षा कहते है। परिवीक्षा अवधि में अपराधी न्यायालय के नियन्त्रण में रहता है तथा न्यायालय द्वारा नियुक्त परिवीक्षा अधिकारी की देख-रेख व निर्देशन में कार्य करता है। परिवीक्षा का मुख्य उद्देश्य अपराधी का सुधार करना तथा उसे समाज में पुनः स्थापित करना है।

परिवीक्षा के कारण (Due to probation)

  1. अपराधी के कारावास के दण्ड का स्थगन।
  2. अपराधी को समाज में रह कर स्वयं को समाज में पुनः स्थापित करने की अनुमति।
  3. न्यायालय द्वारा नियुक्त परिवीक्षा अधिकारी द्वारा अपराधी का पर्यवेक्षण।
  4. अपराधी की सशर्त रिहाई।

अपराधी को परिवीक्षा पर रिहा करने की शर्तें (Terms to release the offenderon probation)

  1. कोई दण्डनीय अपराध नहीं करेगा।
  2. आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों से मेलजोल तथा कोई सम्बन्ध नहीं रखेगा एवं भविष्य में कोई अपराध या असामाजिक कार्य नही करेगा।
  3. ईमानदारी तथा परिश्रम से अर्जित धन से अपना तथा अपने परिवार का जीविकोपार्जन करेगा।
  4. शराबी प्रवृत्ति के व्यक्तियों से दूर रहेगा।
  5. परिवीक्षा अवधि में परिवीक्षा अधिकारी के नियन्त्रण में रहेगा तथा परिवीक्षा अधिकारी की आज्ञा के बिना अपने निवास स्थान में कोई परिवर्तन नही करेगा एवं परिवीक्षा अधिकारी की आज्ञा के बिना कोई यात्रा नही करेगा।
  6. न्यायालय की शर्तों का पूर्णतया पालन करेगा।

ऐसे अपराध जिसमें अपराधी को परिवीक्षा पर नहीं रिहा किया जा सकता (Offence in which the offender can not be released on probation)

  1. हत्या के अपराध के अपराधी को।
  2. देशद्रोह के अपराध के  अपराधी को।
  3. मृत्युदण्ड के अपराध के अपराधी को।

परिवीक्षा अधिकारी (Probation Officer) कौन हैं?

परिवीक्षा पर छोडे गये अपराधी की देखभाल करने एवं उसकी गतिविधियों पर नियन्त्रण रखने के लिए नियुक्त किये गये अधिकारी को परिवीक्षा अधिकारी कहते हैं।

परिवीक्षा अधिकारी पद पर नियुक्त होने के लिए योग्यताएं (Qualifications for appointment to the post of probation officer)

  1. परिवीक्षा अधिकारी को कम से कम स्नातक होना चाहिए तथा समाज विज्ञान के सम्बन्ध में अच्छी जानकारी होनी चाहिए।
  2. सीधे स्वभाव एवं शान्त प्रकृति का होना चाहिए।
  3. बाल स्वभाव तथा बाल मनोविज्ञान में दक्ष होना चाहिए।
  4. बच्चों के स्वभाव एवं उनके मनोविज्ञान को परखने की दक्षता होनी चाहिए।
  5. कानून तथा न्यायालय की कार्यवाहियों की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
  6. समय-समय पर अच्छे एवं दृढ निर्णय लेने की क्षमता होनी चाहिए।

परिवीक्षा अधिकारी के कर्तव्य (Duties of probation officer)

  1. न्यायालय द्वारा परिवीक्षा पर छोड़े गये अपराधी की देखभाल तथा उसकी प्रत्येक गतिविधियों पर नियन्त्रण रखना।
  2. न्यायालय द्वारा परिवीक्षा पर छोड़े गये अपराधी के सम्बन्ध में अपेक्षित सूचना एवं आंकडे एकत्र करना।
  3. परिवीक्षा पर छोड़े गये अपराधी को पुनः समाज में स्थापित होने में मदद करना।
  4. यदि परिवीक्षा पर छोड़ा गया अपराधी परिवीक्षा अवधि में पुनः अपराध करता है या न्यायालय की शर्तों का उल्लंघन करता है तो न्यायालय को सूचित कर उक्त अपराधी की परिवीक्षा निरस्त कराना।

भारतवर्ष में प्रचलित परिवीक्षा (Probation prevalent in India)

  1. दण्ड के अधिरोपण का निलम्बन होता है । इसमें दण्ड नहीं दिया जाता है।
  2. रिहाई की शर्तों को तोड़ने पर न्यायालय ऐसे अपराधी को उसके अपराध के लिए दण्ड दे सकता है।
  3. परिवीक्षा की अधिकतम अवधि 3 वर्ष होती है।
  4. सभी न्यायिक मजिस्ट्रेट अभियुक्तों को परिवीक्षा पर सशर्त रिहा कर सकते हैं।
  5. अपराधी परिवीक्षा अधिनियम- 1958 के अनुसार हत्या, देशद्रोह तथा मृत्युदण्ड के अपराध के अपराधी को परिवीक्षा पर नहीं रिहा किया जा सकता है।

परिवीक्षा से लाभ (Benifite from the probation)

  1. अपराधी को अपना सुधार करके स्वयं को समाज में पुनः स्थापित करने का अवसर प्राप्त होता है।
  2. अपराधी कारावास या दण्ड भोगने से बच जाता है।
  3. कारावास में अपराधियों की संख्या कम हो जाने के कारण सरकारी खर्च में कमी आती है।
  4. कारावास के दण्ड से बच जाने के कारण अपराधी हीन भावना से ग्रसित होने से बच जाता है।
  5. अपराधी में आत्मसम्मान की भावना विकसित होती है जिससे वह अच्छा जीवन बिताने की तरफ अग्रसर होता है।
  6. सजामाफी के कारण अपराधी सामाजिक घृणा से बच जाता है।
  7. अपराधी को अपने पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन का अवसर मिल जाता है।

परिवीक्षा तथा पैरोल में अन्तर (Difference between probation and parole)

  1. परिवीक्षा न्यायालय द्वारा प्रदान की जाती है जबकि पैरोल जिला मजिस्ट्रेट, मण्डलायुक्त तथा शासन द्वारा प्रदान किया जाता है।
  2. परिवीक्षा में जेल में नहीं रहना पड़ता जबकि पैरोल में कुछ अवधि तक जेल में रहना आवश्यक है ।
  3. परिवीक्षा में उपचार सजा से पहले प्रारम्भ होता है जबकि पैरोल में सजा के बाद ।
  4. पैरोल सजायाफ्ता बन्दी को दिया जाता है जबकि परिवीक्षा विचाराधीन बन्दी को दिया जाता है।
  5. पैरोल के समय की अवधि में अपराधी हिरासत में माना जाता है जबकि परिवीक्षा में ऐसा नहीं होता है।

∙ परिवीक्षा की अधिकतम अवधि कितनी होती है?

तीन वर्ष।

  परिवीक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अपराधी का सुधार करना तथा उसे समाज में पुनः स्थापित करना।

∙  न्यायालय द्वारा परिवीक्षा पर छोडे गये अपराधी का पर्यवेक्षण कौन करता है?

न्यायालय द्वारा नियुक्त परिवीक्षा अधिकारी।

∙  परिवीक्षा अधिकारी की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

न्यायालय द्वारा।

∙ क्या अपराधी एक ही समय में दो सजाओं पर परिवीक्षा ले सकता है?

नही ले सकता है।

∙ परिवीक्षा की शर्तों का उल्लंघन करने पर क्या होता है?

शेष सजा जेल में काटनी पडती है तथा फिर से परिवीक्षा नही मिलती है।