अन्वेषण की कार्य प्रणाली (Procedure for Investigation)

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अन्वेषण की कार्य प्रणाली

जब पुलिस अधिकारी को प्रथम सूचना रिपोर्ट के माध्यम से किसी संज्ञेय अपराध के कारित होने की सूचना मिलती है तो उसी समय अन्वेषण का कार्य प्रारम्भ हो जाता है। यह आवश्यक नही है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट के माध्यम से ही अपराध घटित होने की सूचना मिले। यदि पुलिस अधिकारी के पास संदेह करने का कारण हो कि कोई संज्ञेय अपराध कारित हुआ है तो पुलिस अधिकारी प्रथम सूचना रिपोर्ट का इन्तजार किए बिना ही अन्वेषण (विवेचना) प्रारम्भ कर सकता है।

संज्ञेय अपराध घटित होने की सूचना प्राप्त होने पर अन्वेषणकर्ता पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल पर जाता है, घटनास्थल का निरीक्षण करता है, घटनास्थल को सुरक्षित करता है, घटनास्थल का नक्शा नजरी बनाता है, मौके पर पाये गये दृश्य का वर्णन करता है, मौके पर मौजूद वादी मुकदमा / मजरूब / साक्षियों के कथन अंकित करता है, मौके पर घटनास्थल पर पाये गये मुकदमें से सम्बन्धित माल मुकदमाती नियमानुसार कब्जे पुलिस में लेता है। यदि कोई मजरूब घटनास्थल पर है तो उसे तत्काल चिकित्सीय परीक्षण हेतु निकटवर्ती चिकित्सालय भेजता है। यदि मौके पर डाग स्क्वाड की आवश्यकता है तो डाग स्क्वाड बुलाता है जिसकी मदद से अभियुक्त की पहचान करने में काफी मदद मिलती है। यदि कोई ऐसा माल मुकदमाती कब्जे पुलिस में लिया गया है तो जिसका परीक्षण कराया जाना है तो उसे सम्बन्धित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजकर परीक्षण कराया जाता है। माल की तलाशी कर उसे जब्त करता है। अभियुक्त की तलाश करता है, दविश देता है तथा अभियुक्त की गिरफ्तारी कर उसका कथन अंकित करता है तथा पर्याप्त साक्ष्य पाये जाने पर अभियुक्त को नियमानुसार निर्धारित समयावधि के अन्दर सम्बन्धित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करता है तथा न्यायालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराकर अनुरोध कर न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड प्राप्त कर उसे जेल भेजता है।

निकाराम बनाम स्टेट आफ हिमांचल प्रदेश,(1972) 2 SCC 80: 1972 SCC (Cri) 635: AIR 1972 SC 2077; स्टेट आफ मध्य प्रदेश बनाम मुबारक अली, AIR 1959 SC 707 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः संदिग्ध व्यक्ति की खोज तथा गिरफ्तारी को अन्वेषण की दिशा में ही एक आवश्यक कदम माना गया है।

H.N.रिशबूद बनाम स्टेट आफ दिल्ली, AIR 1955 SC 196 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः अन्वेषण की कार्य प्रणाली के अन्तर्गत निम्नांकित कार्यवाहियां सम्मिलित हैः-

  1. संज्ञेय अपराध घटित होने की सूचना मिलने पर तत्काल घटनास्थल के लिए प्रस्थान करना।
  2. प्रकरण के तथ्यों तथा उसकी परिस्थितियों को अभिनिश्चित करना।
  3. संदिग्ध व्यक्ति की खोज कर उसकी गिरफ्तारी करना।
  4. साक्षियों के कथन अंकित करना।
  5. विभिन्न स्थानों की तलाशी एवं सम्बन्धित वस्तुओं की जब्ती करना।
  6. मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारण के लिए मामले को ले जाने से पूर्व यह अभिनिश्चित करना कि अभियुक्त के विरूध्द प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है या नही।

कान्तिलाल दामोदरदास स्टेट आफ गुजरात AIR 1970 Guj 218 में माननीय न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के अनुसारः अन्वेषण करने के लिए सामान्यतया पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को स्वयं घटनास्थल पर जाना चाहिए परन्तु इसके लिए वह अपने अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी को भी प्रतिनियुक्त कर सकता है।

गेबरियल, रि, 1977 Cri LJ 135 के अनुसारः यदि किसी पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से इन्कार कर देता है तथा इस आशय की रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को दी जाती है तो पुलिस अधीक्षक या तो स्वयं अन्वेषण प्रारम्भ कर देगा या इसके अन्वेषण हेतु अपने किसी अधीनस्थ को नियुक्त कर सकेगा।

अन्वेषणकर्ता पुलिस अधिकारी को किसी संज्ञेय अपराध के घटनास्थल पर जाते समय निम्न सामग्री अपने साथ ले जाना चाहिएः-

  1. प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति।
  2. घटनास्थल से सम्बन्धित क्षेत्र के अपराधियों व अपराधों की टिप्पणियों की प्रति।
  3. कागज, कार्बन, कलम, पेंसिल, गोंद, सील-चपड़ी आदि।
  4. घटनास्थल के आस-पास के क्षेत्र का नक्शा।
  5. उपस्थिति, तलाशी, निरोध, बन्धपत्र, साक्षियों के कथन आदि के प्रपत्र।
  6. समन ।
  7. लिफाफा, टार्च, मोमबत्ती, घड़ी, साधारण व ट्रेसिंग कपड़ा, साबुन, तौलिया तथा कैमरा।
  8. वाहन।
  9. वृहणयन्त्र (मैग्नीफाईंग ग्लास), ब्रस तथा नापने का फीता आदि।
  10. प्लास्टर आफ पेरिस, बन्दूक, रिवाल्वर, बेंड़ी, हथकड़ी आदि।