पुलिस अधिकारी (विवेचक) द्वारा आरोप पत्र तैयार किया जाना (Chargsheet prepared by Police Officer)

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जब किसी अभियोग की विवेचना से अभियुक्ति के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाया जाता है तो विवेचक द्वारा दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 173 के प्रावधानों के अनुसार अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर विचारण हेतु सम्बन्धित न्यायालय भेजा जाता है जिसमें सम्पूर्ण विवेचना का संक्षिप्त विवरण अंकित किया जाता है जिसके आधार पर विचारण न्यायालय द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध आरोप बनाया जाता है ।

आरोप पत्र तैयार करते समय विवेचक द्वारा रखी जाने वाली सावधानियांः

आरोप पत्र तैयार करते समय आरोपपत्र का कोई भी कालम खाली न छोड़ा जाए, सभी कालम भरे जाएं । यदि किसी का कालम की सूचना शून्य है तो उसे शून्य ही अंकित किया जाए ।

आरोपपत्र में अभियुक्त के विरुद्ध पाए जाने वाले आरोप को स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए ।

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आरोप पत्र में यह भी अंकित किया जाए कि अभियुक्त का चालन किन- किन धाराओं में किया जा रहा है ।

आरोप पत्र जिस अभियुक्त के विरुद्ध प्रेषित किया जा रहा है उसके सम्बन्ध में यह भी अंकित किया जाए कि वह अभियुक्त गिरफ्तार हुआ है या न्यायालय में आत्मसमर्पण किया है ।

यदि ऐसे अपराध में अभियुक्त के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया जा रहा है जिसमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है तो अभियुक्त को धारा- 41(1) सी0आर0पी0सी0 की नोटिस अवश्य दी जाए तथा इसका विवरण आरोप पत्र में अंकित किया जाए ।

आरोप पत्र में अभियुक्त का पूरा नाम, वल्दियत, पूरा पता तथा उम्र स्पष्ट रूप से अंकित की जाए ।

गिरफ्तारी के अभियोग में यदि अभियुक्त गिरफ्तार नहीं हुआ है तथा न्यायालय में आत्मसमर्पण भी नहीं किया है तो उसके विरुद्ध धारा- 82 / 83 दण्ड प्रक्रिया संहिता की कार्यवाही किए जाने के बाद ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाए तथा इसका विवरण आरोप पत्र में अवश्य अंकित किया जाए ।

भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय 12 या 17 में वर्णित अपराधों में किसी भी अपराध की विवेचना करते समय यदि यह ज्ञात होता है कि अभियुक्त उसी प्रकार के अपराध में पूर्व में न्यायालय से सजा पाया है तो धारा- 75 भारतीय दण्ड संहिता में अधिक दण्ड देने हेतु न्यायालय से अनुरोध किया जाए ।

आरोप पत्र में स्पष्ट रूप से अंकित किया जाए कि कौन सा गवाह क्या साक्ष्य देगा ।

 

आरोपपत्र में गवाहों का पूरा नाम,  वल्दियत,  पूरा पता और यदि हो तो मोबाइल नम्बर भी अंकित किया जाए ताकि विचारण के दौरान साक्ष्य देने के लिए  न्यायालय द्वारा उन्हें  बुलाने में आसानी हो ।

यदि अभियोग ऐसा है जिसमें आरोप पत्र प्रेषित करने हेतु अभियुक्त के विरुद्ध जिलाधिकारी, राज्य सरकार या केन्द्र सरकार से अभियोजन अनुमति लिया जाना आवश्यक है तो ऐसे अभियोग में अभियोजन अनुमति लिए जाने के बाद ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाए जिसका विवरण भी आरोप पत्र में अंकित किया जाए ।

यदि विवेचना में कई विवेचक रहे हैं तो प्रत्येक  विवेचक के नाम, वर्तमान पते तथा मोबाइल नम्बर के साथ-साथ उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों का संक्षिप्त विवरण अंकित किया जाए ।

यदि अपराध जिसकी विवेचना की जा रही है, विस्फोटक पदार्थ या मादक द्रव्य से सम्बन्धित है तो परीक्षण हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला प्रेषित करने के उपरान्त ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाए तथा परीक्षण हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला ले जाने वाले कर्मी का नाम, पता अवश्य अंकित किया जाए ।

यदि हत्या, बलात्कार या अन्य किसी अपराध में कपड़ा, मिट्टी, रक्त, बाल, बरामद  कोई आला कत्ल या अन्य कोई वस्तु परीक्षण हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाना है तो उसे परीक्षण हेतु नियमानुसार विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजने के उपरान्त ही आरोप पत्र प्रेषित किया जाए ।

हिंसा के किसी अपराध में आरोप पत्र प्रेषित करते समय न्यायालय से अनुरोध किया जाए कि यदि अभियुक्तों को दण्डित किया जाता है तो आगामी 3 वर्षों के लिए शान्ति बनाए रखने हेतु जमानत एवं मुचलके पर भी पाबन्द किया जाए ।

जिस अपराध की विवेचना की जा रही है उस अपराध का अभियुक्त जेल में है तो निर्धारित अवधि के अन्दर आरोप पत्र सम्बन्धित न्यायालय में दाखिल किया जाए अन्यथा अभियुक्त जमानत पर छूट जायेगा ।

यदि चिकित्सक द्वारा कोई चोट विचाराधीन रखी गई है तो उसकी पूरक रिपोर्ट प्राप्त कर विवेचना में सम्मिलित किए जाने के उपरान्त ही आरोप पत्र तैयार किया जाए जिसका विवरण आरोप पत्र में अवश्य अंकित किया जाए ।

धारा- 468 सी0आर0पी0सी0 में वर्णित निर्धारित अवधि के अन्दर ही आरोप पत्र माननीय न्यायालय में दाखिल किया जाए अन्यथा न्यायालय आरोप पत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर देगा ।

 

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