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परिवाद (COMPLAINT)

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  • परिवाद क्या है ?

परिवाद किसी न्यायिक कार्यवाही का प्रथम चरण है जिसके न्यायालय में प्रस्तुत होने पर न्यायिक कार्यवाही आरम्भ होती है।

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा–2(घ) के अनुसारः

“परिवाद का अभिप्राय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 के अन्तर्गत कार्यवाही किये जाने की दृष्टि से लिखित या मौखिक रूप में किसी मजिस्ट्रेट से किया गया वह कथन है कि किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया है, चाहे वह ज्ञात हो या अज्ञात  परन्तु इसके अन्तर्गत पुलिस रिपोर्ट सम्मिलित नही है।

परिवाद का मुख्य उद्देश्य उस मजिस्ट्रेट द्वारा कार्यवाही किया जाना है जिसके समक्ष वह प्रस्तुत किया गया है।

  • परिवाद का क्या अर्थ है ?

शिकायत, निन्दा या दोषारोंपण।

  • क्या पुलिस रिपोर्ट को परिवाद माना जा सकता है ?

सामान्यतया पुलिस रिपोर्ट को परिवाद नहीं माना जाता है परन्तु यदि किसी मामले में अन्वेषण के पश्चात् किसी असंज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट होता है तो ऐसी दशा में पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई पुलिस रिपोर्ट को परिवाद तथा पुलिस अधिकारी को परिवादी माना जाता है।

  • क्या रेलवे सुरक्षा बल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को परिवाद माना जा सकता है ?

 स्टेट आफ बिहार बनाम चन्द्र भूषण सिंह ए0 आई0 आर0 2001 एस0 सी0 429 में  रेलवे सम्पत्ति (अविधिपूर्ण कब्जा) अधिनियम-1966 की धारा-8 के अन्तर्गत रेलवे सुरक्षा बल अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को उच्चतम न्यायालय द्वारा परिवाद माना गया है।

  • परिवाद के आवश्यक लक्षणः

(1) परिवाद लिखित या मौखिक किसी भी रूप में हो सकता है।

(2) परिवाद मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

(3) परिवाद का मुख्य उद्देश्य उस मजिस्ट्रेट द्वारा कार्यवाही किया जाना है जिसके समक्ष वह प्रस्तुत किया गया है।

(4) किसी भी शिकायत को तब तक परिवाद नहीं माना जाता है जब तक कि वह विधि द्वारा दण्डनीय कोई अपराध गठित नहीं करता।

(5) पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट को परिवाद नहीं माना जाता परन्तु यदि अन्वेषण के पश्चात असंज्ञेय अपराध होना प्रकट हो तो पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट को परिवाद माना जाता है।

(6) परिवादी द्वारा परिवाद में उस साक्ष्य का उल्लेख किया जाना आवश्यक नहीं है जो उसके पास विद्यमान है।

(7) परिवाद में अपराधी का उल्लेख होना आवश्यक नहीं है आवश्यक मात्र यह है कि वह अपराधी के चरित्र को स्पष्ट तथा निश्चित करता हो।

(8) परिवाद का मुख्य उद्देश्य उस मजिस्ट्रेट द्वारा कार्यवाही किया जाना है जिसके समक्ष वह प्रस्तुत किया गया है।

  • परिवाद तथा प्रथम सूचना रिपोर्ट में अन्तरः

(1) परिवाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है जबकि प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस के समक्ष प्रस्तुत की जाती है।

(2) परिवाद प्रस्तुत होने पर मजिस्ट्रेट द्वारा जांच की जाती है जबकि प्रथम सूचना रिपोर्ट प्राप्त होने पर अन्वेषण प्रारम्भ किया जाता है।

(3) परिवाद पर जांच के उपरान्त अपराध का संज्ञान लिया जाता है जबकि प्रथम सूचना रिपोर्ट पर अन्वेषण के पश्चात पुलिस रिपोर्ट तैयार कर सम्बन्धित न्यायालय को प्रेषित की जाती है।

(4) परिवाद को मजिस्ट्रेट अन्वेषण हेतु पुलिस अधिकारी को भेज सकता है परन्तु प्रथम सूचना रिपोर्ट जांच हेतु मजिस्ट्रेट को नहीं भेजी जा सकती।

  • परिवाद किसके समक्ष प्रस्तुत किया जाता है ?

परिवाद न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।

  • परिवाद की जांच किसके द्वारा की जाती है ?

मजिस्ट्रेट द्वारा।

  • परिवाद का क्या उद्देश्य है ?

परिवाद का मुख्य उद्देश्य उस मजिस्ट्रेट द्वारा कार्यवाही किया जाना है जिसके समक्ष वह प्रस्तुत किया गया है।

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