Saturday, September 19, 2020
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पैरोल (PAROLE)

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  • पैरोल (PAROLE)

पैरोल वह व्यवस्था है जिसमें कारावास की सजा काट रहे किसी बन्दी को कारावास की अवधि का कुछ भाग जेल में व्यतीत करने के उपरान्त कुछ विशेष शर्तों पर सीमित अवधि के लिए समाज में रहने के लिए मुक्त कर दिया जाता है।

  • पैरोल का उद्देश्यः

(1) समाज में बन्दी का रचनात्मक समायोजन तथा कारावास के दुष्परिणामों को कम करना।

(2) लम्बी अवधि से सजा काट रहे बन्दियों में निराशा तथा कड़वाहट के दृष्टिकोण पर रोंक लगाना।

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(3) लम्बी अवधि से सजा काट रहे अपराधी को संकटकाल में या विशिष्ट अवसरों पर अपने परिवार के साथ रहने का अवसर प्रदान किया जाना।

  • पैरोल पर रिहाई के लिए आवश्यक शर्तेंः

(1) किसी अपराध में दन्डित होने पर बन्दी जेल में सजा काट रहा हो।

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(2) बन्दी का जेल में व्यवहार अच्छा हो।

  • पैरोल किसे नहीं दिया जा सकता है ?

(1) देशद्रोह में सजायाफ्ता व्यक्ति को।

(2) ठगी, डकैती, सैनिक अपराधी तथा जाली नोट बनाने वाले अपराधी को।

(3) उस अपराधी को जिसकी सजा मात्र 01 वर्ष बची हो।

(4) उस अपराधी को जिसको 05 वर्ष से कम सजा मिली हो।

  • पैरोल कौन-कौन अधिकारी दे सकते हैं ?

(1)जिलाधिकारी 15 दिन तक का पैरोल दे सकता है।

(2)15 दिन तक दिए गए पैरोल में मण्डलायुक्त 15 दिन की बढोत्तरी कर सकता है।

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(3) उपरोक्त अवधि के उपरान्त पैरोल शासन द्वारा दिया जाता है।

  • पैरोल तथा जमानत में अन्तरः

(1) पैरोल में सम्बन्धित व्यक्ति को दण्ड से मुक्त करके जेल से रिहा किया जाता है जबकि जमानत में दण्ड से मुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है।

(2) पैरोल कार्यपालक मजिस्ट्रेट तथा शासन द्वारा स्वीकृत किया जाता है जबकि जमानत सम्बंन्धित न्यायालय द्वारा स्वीकृत की जाती है।

(3) पैरोल में सम्बन्धित व्यक्ति को सजायाफ्ता होने के पश्चात कुछ समय जेल में काटना आवश्यक है जबकि जमानत में इसका कोई प्रतिबन्ध नहीं है।

(4) पैरोल का उद्देश्य लम्बी अवधि से जेल में कारावास की सजा भुगत रहे बन्दी को दण्ड की शेष अवधि हेतु मुक्त करके समाज में रहने का अवसर प्रदान किया जाना है जबकि जमानत विचाराधीन बन्दी को  अपने विरूद्ध पंजीकृत मुकदमे में अपना पक्ष रखने की तैयारी करने के लिए जमानत दी जाती है।

  • पैरोल पर छूटे लोगों के प्रति स्थानीय थाना पुलिस का दायित्वः

(1) पैरोल पर छूटे हुए व्यक्ति पर निरन्तर सतर्क दृष्टि रखते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पैरोल पर छूटा हुआ व्यक्ति पैरोल की शर्तों का पालन कर रहा है  अथवा नही। यदि वह पैरोल की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है तो उसके पैरोल को निरस्त कराने की कार्यवाही करना चाहिए।

(2) पैरोल पर छोड़ा गया व्यक्ति शान्तिपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर रहा है या अपराध में सक्रिय हो गया है। यदि अपराध में सक्रिय हो गया है तो उसका पैरोल निरस्त कराने की कार्यवाही करना चाहिए।

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