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dicia (REMAND BY POLICE OFFOCER)

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  • न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड (JUDICIAL COSTUDY REMAND)

जब किसी अभियोग में किसी अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाद धारा- 57 सी0आर0पी0सी0 के अनुसार यदि 24 घण्टे में विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है तथा विवेचना में और समय लगेगा एवं साक्ष्य पाये जा रहे हैं तो सम्बन्धित थाना भारसाधक अधिकारी या विवेचक धारा- 167(1) सी0आर0पी0सी0 के अनुसार अभियोग की केश डायरी सहित अभियुक्त को समय से सम्बन्धित न्यायालय के समक्ष पेश कर के कारण दर्शित करते हुए दिए न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत किए जाने का अनुरोध करता है तब न्यायालय द्वारा धारा- 167(2) सी0आर0पी0सी0 के अनुसार अभियुक्त के विरूध्द न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत कर अभियुक्त को जेल भेज दिया जाता है। न्यायिक मजिस्ट्रेट के द्वारा एक बार में अधिकतम 15 दिवस तक का न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत किया जा सकता है।

यदि कोई न्यायिक मजिस्ट्रेट उपलब्ध नहीं है तो अभियुक्त को नजदीकी किसी ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड हेतु प्रस्तुत किया जाता है जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा अभियुक्त का 07 दिवस न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत कर जेल भेज दिया जाता है।
गैंगस्टर एक्ट के अपराध में  गैंगस्टर न्यायालय द्वारा एक बार में अधिकतम 60 दिवस तक का न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत किया जा सकता है।
विवेचक द्वारा प्रत्येक बार न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड लेते समय रिमाण्ड लेने का कारण दर्शित किया जाना चाहिए।
  • न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड कौन-कौन स्वीकृत कर सकता है ?  

धारा-167(2) सी0आर0पी0सी0 के अनुसार न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड सम्बन्धित न्यायालय या अन्य किसी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा स्वीकृत किया जाता है जो एक बार में अधिकतम 15 दिवस तक का हो सकता है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की अधिकारिता प्राप्त कोई कार्यपालक मजिस्ट्रेट अधिकतम 7 दिवस का न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत कर सकता है।
  • न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड की  अवधिः

मृत्युदण्ड, आजीवन कारावास तथा 10 साल तक के कारावास से दण्डनीय अपराधों में अधिकतम 90 दिवस तथा अन्य अपराधों में अधिकतम 60 दिवस न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड  स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है।
  • रिमाण्ड प्राप्त करने में सावधानियांः

(1) विवेचक द्वारा प्रत्येक बार न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड कारण दर्शित करते हुए मांगा जाएगा।
(2) न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने या अभियुक्त की जमानत होने के बाद न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड लेना बन्द कर दिया जाता है।
(3) अभियुक्त के जेल में न्यायिक अभिरक्षा में निरूद्ध होने की दशा में रिमाण्ड की निश्चित अधिकतम अवधि के भीतर विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया जाता है। यदि रिमाण्ड की निश्चित अधिकतम अवधि के भीतर विवेचना पूर्ण कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल नही किया जाता है तो और अधिक रिमाण्ड नही प्राप्त होता तथा अभियुक्त जमानत पाने का हकदार हो जाता है जिसका उत्तरदायी विवेचक को माना जाता है।
  • रिमाण्ड प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत पुलिस अधिकारीः

उप निरीक्षक तथा उससे उच्च पंक्ति के पुलिस अधिकारी रिमाण्ड लेने हेतु प्राधिकृत हैं।
  • पुलिस अधिकारी (विवेचक) द्वारा अभियुक्त का पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड (P.C.R.) प्राप्त करनाः

(1)पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड अभियुक्त को मजिस्ट्रेट के पास  प्रथम बार प्रस्तुत करते समय ही मांगना चाहिए।
(2) पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड मांगते समय लिखित रिपोर्ट अभियोग के पर्यवेक्षणाधिकारी की संस्तुति सहित एवं केस डायरी न्यायालय में प्रस्तुत की जाए तथा रिपोर्ट में कारण दर्शित किया जाए की अभियुक्त को पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड में लिए जाने पर और अधिक साक्ष्य जैसे- अभियोग  से सम्बन्धित चोरी / लूट का माल, हत्या के उपकरण आदि अभियुक्त की निशानदेही पर मिल सकता है।
(3) न्यायालय में आत्मसमर्पण करने वाले अभियुक्त को भी पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड पर लिया जा सकता है।
(4) न्यायालय द्वारा पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड स्वीकृत किए जाने के बाद पुलिस अधिकारी (विवेचक) द्वारा अभियुक्त को जेल से प्राप्त कर अभियुक्त की निशानदेही पर अभियोग से सम्बन्धित माल बरामदगी के बाद अभियुक्त का चिकित्सीय परीक्षण कराकर न्यायालय द्वारा निर्धारित समय अवधि में ही जेल में दाखिल किया जाएगा।
  • पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड (P.C.R.) कब लिया जाता है ?

किसी अभियोग की विवेचना के दौरान जब किसी अभियुक्त की निशानदेही पर उस अभियोग से सम्बन्धित किसी माल की बरामदगी होने के आधार / पर्याप्त साक्ष्य पाए जाते हैं। तब पुलिस अधिकारी (विवेचक) द्वारा उस अभियोग से सम्बन्धित माल की बरामदगी हेतु उस अभियुक्त का पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड (P.C.R.) लिया जाता है। पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड (P.C.R.) प्रथम न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड की अवधि में ही लिया जाता है।
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