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पुलिस अधिकारी ( विवेचक ) के अधिकार (Right of Police / Investigating Officer)

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दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 तथा उत्तर प्रदेश पुलिस रेगुलेशन में पुलिस अधिकारी (विवेचक) को निम्नांकित अधिकार प्रदान किए गए हैंः
(1) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 156 के अनुसारः उप निरीक्षक से अनिम्न पंक्ति का पुलिस अधिकारी (विवेचक) किसी संज्ञेय अपराध की विवेचना बिना न्यायालय की अनुमति के कर सकता है तथा न्यायालय द्वारा उसकी विवेचना में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
(2) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-41(1) के अनुसारः विवेचनाकर्ता पुलिस अधिकारी किसी संज्ञेय अपराध से सम्बन्धित अभियुक्त को या किसी ऐसे व्यक्ति को जिस पर संज्ञेय अपराध करने का सन्देह हो या कर्तव्य पालन में बाधा उत्पन्न कर रहा हो,  बिना वारण्ट गिरफ्तार कर सकता है।
(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-46(2) के अनुसारः यदि गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति गिरफ्तारी से बचने का प्रयास करता है या बलात् प्रतिरोध करता है तो विवेचक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक बल प्रयोग कर सकता है परन्तु बल प्रयोग में उसकी मृत्यु कारित नहीं कर सकता जिस पर मृत्युदण्ड या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का अभियोग न हो।
(4) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 47 के अनुसारः विवेचक को यदि यह विश्वास करने का कारण है कि गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति किसी घर के अन्दर छुप गया है तो विवेचक की मांग पर घर का भारसाधक व्यक्ति या मुखिया विवेचक को घर के अन्दर प्रवेश करने तथा तलाशी लेने की सभी सुविधाएं प्रदान करेगा। यदि ऐसा व्यक्ति घर के अन्दर प्रवेश करने से मना करता है तथा तलाशी वारण्ट प्राप्त करने में समय लगेगा तथा उक्त गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति भाग सकता है तो  विवेचक उक्त मकान में खिड़की, दरवाजा तोड़कर प्रवेश करके तलाशी ले सकता है।
(5) धारा- 48(2) सी0आर0पी0सी0 के अनुसारः विवेचक किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे गिरफ्तार करने के लिए वह प्राधिकृत है, वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने के लिए भारत के किसी भी स्थान में  उस व्यक्ति का पीछा कर सकता है।

(6) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 51 के अनुसारः जब किसी पुलिस अधिकारी द्वारा ऐसे वारंण्ट के अधीन जो अजमानतीय है या  ऐसे वारण्ट के अधीन जो जमानतीय है किन्तु गिरफ्तार व्यक्ति जमानत नहीं दे सकता है, कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है तो पुलिस अधिकारी / विवेचक उस व्यक्ति की तलाशी ले सकता है और उसके पहनने के कपड़ों के अलावा उसके पास पाई गई सभी वस्तुओं को सुरक्षित अभिरक्षा में ले सकता है तथा ऐसे सभी वस्तुओं की रसीद उस व्यक्ति को दी जाएगी। यदि गिरफ्तारशुदा व्यक्ति कोई महिला है तो उसकी तलाशी शिष्टता का पूरा ध्यान रखते हुए किसी महिला पुलिस अधिकारी या अन्य किसी स्त्री द्वारा ली जाएगी।
(7) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 52 के अनुसारः जब विवेचक किसी अभियुक्त को गिरफ्तार करता है तथा उसके पास से कोई आक्रामक शस्त्र जैसे- लाठी, बल्लम, तमंचा, बन्दूक, गड़ासा आदि बरामद होता है तो विवेचक उस आक्रामक शस्त्र को कब्जे में ले सकता है।
(8) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 53 के अनुसारः विवेचक किसी गिरफ्तार शुदा व्यक्ति का शारीरिक परीक्षण किसी सरकारी अस्पताल के  चिकित्सक से करा सकता है।
(9) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 55 के अनुसारः अन्वेषणकर्ता पुलिस अधिकारी (विवेचक) किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे वह बिना वारण्ट गिरफ्तार करने के लिए प्राधिकृत है, को गिरफ्तार करने के लिए लिखित आदेश देकर अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारी को नियुक्त कर सकता है।
(10) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 57 के अनुसारः विवेचक किसी अभियोग में गिरफ्तारशुदा व्यक्ति को 24 घण्टे तक अपनी अभिरक्षा में रख सकता है जिसमें गिरफ्तारी के स्थान से सम्बन्धित न्यायालय तक पहुंचने का समय सम्मिलित नहीं है।
(11) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 91 के अनुसारः विवेचक अभियुक्त से या अन्य किसी व्यक्ति से जिसके कब्जे में अभियोग से सम्बन्धित अभिलेख या वस्तु होने का विश्वास है, उक्त सम्बन्धित व्यक्ति को लिखित आदेश देकर उस अभिलेख या वस्तु को नियत तिथि व स्थान पर प्रस्तुत करने की अपेक्षा कर सकता है।
(12) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 102 के अनुसारः विवेचक किसी ऐसी सम्पत्ति को अपने कब्जे में ले सकता है जिसके बारे में सन्देह है कि वह चोरी की है या ऐसी परिस्थितियों में पाई जाती है जिससे किसी अपराध किए जाने का सन्देह हो।
(13) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 160 के अनुसारः विवेचक अपराध से सम्बन्धित अभियुक्त तथा संदिग्ध व्यक्ति को पूंछतांछ करने के लिए तलब कर सकता है।                     
(14) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 161 के अनुसारः विवेचक किसी अपराध से सम्बन्धित अभियुक्त तथा संदिग्ध व्यक्ति से पूंछतांछ कर सकता है।
(15) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा- 165 के अनुसारः यदि विवेचक को यह विश्वास करने का उचित आधार है कि उसके अन्वेषण से सम्बन्धित कोई वस्तु उसके थाना क्षेत्र की सीमा के अन्दर किसी स्थान पर बिना विलम्ब के मिल सकती है तब विवेचक इन आधारों को लिखते हुए ऐसे स्थान की बिना वारण्ट तलाशी ले सकता है।
(16) दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-167 के अनुसारः विवेचक अभियोग से सम्बन्धित गिरफ्तारशुदा अभियुक्त जिसके विरुद्ध साक्ष्य पाया जाता है को 24 घण्टे के अन्दर सम्बन्धित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करके न्यायिक अभिरक्षा रिमाण्ड / पुलिस अभिरक्षा रिमाण्ड ले सकता है।
(17) साक्ष्य अधिनियम की धारा- 159 के अनुसारः विवेचक न्यायालय में किसी अपराध में साक्ष्य देते समय अपनी स्मृति ताजा करने के लिए केस डायरी का अवलोकन कर सकता है।
(18) पुलिस रेगुलेशन पैरा- 236 के अनुसारः विवेचक को विवेचना के दौरान अपराध में संदिग्ध पाए जाए व्यक्तियों की गोपनीय निगरानी कर सकता है ताकि वह निष्कर्ष पर पहुंच सके कि ऐसा व्यक्ति वास्तव में अपराध में संलिप्त है या नहीं । उक्त निगरानी में इलेक्ट्रानिक सर्विलान्स भी सम्मिलित है।
(19) अभिरक्षा रिमाण्ड पुलिस रेगुलेशन के पैरा- 116  व 117 के अनुसारः विवेचक उन अपराधियों को गिरफ्तार करने के बाद बापर्दा रखेगा, जिनकी गवाहों से कार्यवाही शिनाख्त कराई जानी है तथा बापर्दा ही सम्बन्धित न्यायालय में प्रस्तुत करके जेल में बापर्दा रखे जाने हेतु वारण्ट बनवा कर जेल में दाखिल करेगा। विवेचक चोरी, लूट, डकैती के अभियोग में बरामद उन सम्पत्तियों को बरामद करने के बाद मौके पर ही फर्द लिखकर सील व सर्व मोहर करेगा तथा थाना मालखाने से सदर मालखाने में शीघ्र दाखिल करायेगा।
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